दिलचस्प बात यह है कि इतना बड़ा संभावित लाभ होने के बावजूद Meta और Google IPO के दौरान अपनी हिस्सेदारी का एक भी शेयर नहीं बेच रही हैं। दोनों कंपनियां जियो में अपना निवेश बनाए रखेंगी। इससे यह संकेत मिलता है कि वे फिलहाल कंपनी की भविष्य की संभावनाओं में अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहती हैं।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि लगभग ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा वास्तविक रूप से प्राप्त किया गया मुनाफा नहीं है। यह IPO के प्रस्तावित उच्चतम मूल्य पर आधारित अनुमानित लाभ है, जिसे निवेश की लागत और मौजूदा संभावित मूल्य के अंतर से निकाला गया है।
Jio IPO में Meta और Google को कितना मुनाफा हो सकता है?
द इकोनॉमिक टाइम्स की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, Meta और Google ने साल 2020 में जियो में निवेश करते समय प्रति शेयर ₹488.34 की कीमत पर शेयर हासिल किए थे। अब जियो के IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर निर्धारित किया गया है।
अगर IPO में शेयर की कीमत ₹1,119 के ऊपरी स्तर पर तय होती है, तो दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य काफी बढ़ जाएगा।
| विवरण | Meta | |
|---|---|---|
| जियो में हिस्सेदारी | 9.98% | 7.73% |
| शेयरों की संख्या | लगभग 89.23 करोड़ | लगभग 69.09 करोड़ |
| 2020 में प्रति शेयर कीमत | ₹488.34 | ₹488.34 |
| अनुमानित निवेश लागत | ₹43,573 करोड़ | ₹33,737 करोड़ |
| ₹1,119 प्रति शेयर पर संभावित मूल्य | ₹99,846 करोड़ | ₹77,307 करोड़ |
| अनुमानित कागजी मुनाफा | ₹56,272 करोड़ | ₹43,569 करोड़ |
इस हिसाब से Meta को लगभग ₹56,272 करोड़ और Google को करीब ₹43,569 करोड़ का कागजी मुनाफा हो सकता है। दोनों के संभावित लाभ को जोड़ने पर यह रकम लगभग ₹99,841 करोड़ बैठती है।
यह गणना IPO के ऊपरी मूल्य पर आधारित है। वास्तविक बाजार मूल्य लिस्टिंग के बाद शेयर की मांग और कीमत में होने वाले बदलावों के अनुसार अलग हो सकता है।
2020 में Meta और Google ने जियो में क्यों लगाया था पैसा?
साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो के डिजिटल कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश जुटाया था। इस दौरान दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियों और निवेश संस्थानों ने जियो में पैसा लगाया।
Meta और Google का निवेश खास तौर पर महत्वपूर्ण था, क्योंकि दोनों कंपनियां डिजिटल सेवाओं, इंटरनेट, विज्ञापन, ऑनलाइन कारोबार और तकनीकी इकोसिस्टम में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति रखती हैं।
Meta की जियो में हिस्सेदारी को भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार और WhatsApp के व्यावसायिक अवसरों से जोड़कर देखा गया। Google के लिए जियो के साथ साझेदारी का महत्व भारत के तेजी से बढ़ते इंटरनेट बाजार और डिजिटल सेवाओं तक अधिक लोगों की पहुंच से जुड़ा रहा।
जियो का उद्देश्य केवल मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहा है। कंपनी ने टेलीकॉम सेवाओं के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवाओं और तकनीकी समाधानों का विस्तार किया है।
इसी व्यापक कारोबारी संभावना के कारण जियो में निवेश करने वाली कंपनियों को भविष्य में अपने निवेश का मूल्य बढ़ने की उम्मीद रही होगी।
Jio IPO में Meta और Google अपने शेयर क्यों नहीं बेच रही हैं?
जियो के IPO की सबसे खास बात यह है कि इसमें मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसे फ्रेश इश्यू कहा जाता है।
जब कोई कंपनी फ्रेश इश्यू के माध्यम से IPO लाती है, तो नए शेयर जारी करके पैसा कंपनी के लिए जुटाया जाता है। इसके विपरीत, ऑफर फॉर सेल यानी OFS में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं और बिक्री से मिलने वाला पैसा उन्हें मिलता है।
जियो का प्रस्तावित IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू पर आधारित है। इसलिए Meta और Google अपनी हिस्सेदारी बेचकर इस निर्गम से पैसा नहीं निकाल रही हैं।
इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि दोनों कंपनियां भविष्य में जियो की संभावित वृद्धि में भागीदार बनी रहेंगी। हालांकि, केवल शेयर न बेचने के निर्णय से उनके भविष्य के निवेश संबंधी इरादों के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
Jio Platforms IPO से कितना पैसा जुटाएगी रिलायंस?
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO लगभग ₹30,213 करोड़ जुटाने के लिए प्रस्तावित है। इसके लिए कंपनी करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी।
IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर है। ऊपरी मूल्य पर कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन लगभग ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।
यह निर्गम भारतीय IPO बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके जरिए जियो को पहली बार शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी के रूप में अलग बाजार मूल्यांकन मिलने का रास्ता खुलेगा।
प्रस्तावित निर्गम से मिलने वाली रकम में से लगभग ₹27,500 करोड़ कर्ज के पुनर्भुगतान या पूर्व भुगतान के लिए निर्धारित किए गए हैं। बाकी राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
इस तरह IPO का उद्देश्य केवल बाजार से पैसा जुटाना नहीं, बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना भी है।
जियो के IPO से रिलायंस और दूसरे निवेशकों को क्या फायदा होगा?
जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से निवेशकों को कंपनी के मूल्यांकन और प्रदर्शन को स्वतंत्र रूप से देखने का अवसर मिलेगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए यह उसके टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार का अलग मूल्यांकन सामने लाने का महत्वपूर्ण कदम है। अभी तक जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस समूह का हिस्सा है, लेकिन IPO के बाद बाजार में उसके शेयरों की कीमत के आधार पर उसके कारोबार का मूल्य अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा।
Meta और Google जैसे शुरुआती निवेशकों को भी अपनी हिस्सेदारी का बाजार मूल्य देखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, जब तक वे शेयर बेचते नहीं हैं, तब तक उनके निवेश पर हुआ लाभ कागजी ही रहेगा।
इसके अलावा, IPO में नए शेयर जारी होने से मौजूदा निवेशकों की कुल शेयर संख्या नहीं बदलती, लेकिन कंपनी के कुल शेयरों की संख्या बढ़ने के कारण उनकी प्रतिशत हिस्सेदारी कम हो सकती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि मौजूदा निवेशकों ने अपने शेयर बेच दिए हैं। यह नए शेयर जारी होने से होने वाला हिस्सेदारी का संभावित पतला होना यानी डाइल्यूशन है।
क्या Jio IPO में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है?
जियो का बड़ा कारोबार, व्यापक ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं में मौजूदगी निवेशकों के लिए आकर्षक पहलू हो सकते हैं। लेकिन किसी भी IPO में निवेश करने से पहले केवल कंपनी के नाम या शुरुआती निवेशकों के संभावित मुनाफे को देखकर निर्णय लेना उचित नहीं है।
निवेशकों को कंपनी का मूल्यांकन, आय में वृद्धि, मुनाफा, कर्ज, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को समझना चाहिए।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि Meta और Google जैसी बड़ी कंपनियों की निवेश रणनीति और जोखिम उठाने की क्षमता किसी सामान्य खुदरा निवेशक से अलग हो सकती है। उनका शेयर नहीं बेचना इस बात की गारंटी नहीं है कि IPO के बाद शेयर की कीमत बढ़ेगी।
लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत बाजार की परिस्थितियों, कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की मांग के आधार पर ऊपर या नीचे जा सकती है।
इसलिए खुदरा निवेशकों के लिए IPO में आवेदन करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और जोखिम संबंधी जानकारियों का अध्ययन करना जरूरी है।
निष्कर्ष
जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी IPO ने Meta और Google के 2020 के निवेश को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। प्रस्तावित ₹1,119 प्रति शेयर के ऊपरी मूल्य पर दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी का संयुक्त अनुमानित कागजी मुनाफा करीब ₹99,841 करोड़ हो सकता है।
इसके बावजूद दोनों कंपनियां IPO में अपने शेयर नहीं बेच रही हैं और जियो में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखेंगी। फ्रेश इश्यू के जरिए जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के वित्तीय उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगी, जिसमें कर्ज का पुनर्भुगतान भी शामिल है।
हालांकि, लगभग ₹1 लाख करोड़ के संभावित मुनाफे को वास्तविक कमाई नहीं समझना चाहिए। यह IPO के प्रस्तावित मूल्य पर आधारित अनुमान है, और निवेश का अंतिम लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि भविष्य में शेयरों का बाजार मूल्य क्या रहता है।


















