कब्ज (Constipation) आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली में सबसे आम लेकिन अक्सर नज़रअंदाज़ की जाने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। बदलती खान-पान की आदतें, फाइबर की कमी वाला भोजन, कम पानी पीना, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता मानसिक तनाव—ये सभी कब्ज को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण बन चुके हैं। यह समस्या केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा, कामकाजी लोग, महिलाएँ और यहाँ तक कि बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।
कब्ज होने पर व्यक्ति को न केवल शारीरिक असहजता होती है, बल्कि इसका असर रोज़मर्रा की दिनचर्या, काम करने की क्षमता और मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। लंबे समय तक कब्ज बने रहने पर यह बवासीर, एनल फिशर और अन्य पाचन संबंधी जटिलताओं का कारण भी बन सकता है। इसके बावजूद, कई लोग इसे मामूली समस्या मानकर समय पर ध्यान नहीं देते।
इस लेख में कब्ज से जुड़ी सभी ज़रूरी जानकारियों को सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है। इसमें आप जानेंगे कि कब्ज क्या है, इसके लक्षण और कारण क्या हैं, यह कितने प्रकार की होती है, साथ ही घरेलू उपाय, सही आहार, बचाव के तरीके और यह भी कि कब डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक हो जाता है। सही जानकारी और थोड़े से जीवनशैली सुधार के साथ कब्ज को नियंत्रित करना और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना संभव है।
कब्ज क्या है? (What is Constipation)
कब्ज एक पाचन संबंधी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को नियमित रूप से मल त्याग करने में कठिनाई होती है या मल सख्त, सूखा और कम मात्रा में निकलता है। सामान्य रूप से स्वस्थ पाचन तंत्र में व्यक्ति को बिना अधिक ज़ोर लगाए सहज रूप से मल त्याग हो जाता है, लेकिन कब्ज की स्थिति में यह प्रक्रिया धीमी और असुविधाजनक हो जाती है।
चिकित्सकीय रूप से, यदि किसी व्यक्ति को सप्ताह में तीन बार से कम मल त्याग होता है, या हर बार मल त्याग के दौरान अत्यधिक ज़ोर लगाना पड़ता है, तो इसे कब्ज माना जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट और पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए केवल संख्या ही नहीं, बल्कि मल की प्रकृति और मल त्याग के दौरान होने वाली परेशानी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कब्ज होने पर मल बड़ी आंत (कोलन) में अधिक समय तक रुका रहता है। इस दौरान आंतें मल से पानी सोख लेती हैं, जिससे मल सख्त और सूखा हो जाता है। यही कारण है कि कब्ज में मल त्याग दर्दनाक हो सकता है और पेट पूरी तरह साफ़ न होने का एहसास बना रहता है।
कब्ज दो प्रकार की हो सकती है—अस्थायी और दीर्घकालिक। अस्थायी कब्ज आमतौर पर खान-पान या दिनचर्या में बदलाव के कारण होती है, जबकि लंबे समय तक बनी रहने वाली कब्ज (क्रॉनिक कब्ज) किसी गंभीर पाचन समस्या या जीवनशैली की गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। इसलिए कब्ज को हल्के में लेने के बजाय समय रहते समझना और नियंत्रित करना आवश्यक है।
कब्ज के लक्षण (Symptoms of Constipation)
कब्ज के लक्षण व्यक्ति से व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इसके कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें समय रहते पहचान लेना ज़रूरी है। शुरुआती अवस्था में ये लक्षण हल्के हो सकते हैं, पर यदि ध्यान न दिया जाए तो धीरे-धीरे समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
सामान्य लक्षण
कब्ज का सबसे आम लक्षण मल त्याग में कठिनाई होना है। मल अक्सर सख्त, सूखा या गांठदार हो जाता है, जिससे उसे बाहर निकालने में ज़ोर लगाना पड़ता है। कई बार शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ़ न होने का एहसास बना रहता है। इसके साथ पेट भारी लगना, गैस बनना, हल्का पेट दर्द या फुलाव महसूस होना भी सामान्य लक्षणों में शामिल है।
अन्य शारीरिक संकेत
लगातार कब्ज रहने पर भूख कम लग सकती है और व्यक्ति सुस्त या थका हुआ महसूस कर सकता है। कुछ लोगों को मतली या सिरदर्द की शिकायत भी हो सकती है, क्योंकि पाचन तंत्र सही ढंग से काम नहीं कर पाता।
गंभीर लक्षण
जब कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके लक्षण गंभीर हो सकते हैं। मल त्याग के दौरान तेज दर्द, गुदा क्षेत्र में जलन या दरार, और मल के साथ खून आना गंभीर संकेत माने जाते हैं। ऐसे मामलों में कब्ज केवल एक असुविधा नहीं, बल्कि किसी जटिल समस्या का कारण बन सकती है।
यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें या लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। समय पर पहचान और सही उपाय अपनाने से कब्ज को बढ़ने से रोका जा सकता है।
कब्ज होने के मुख्य कारण (Causes of Constipation)
कब्ज आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि यह खान-पान, जीवनशैली और शारीरिक आदतों से जुड़े कई कारणों का परिणाम होती है। जब पाचन तंत्र की प्राकृतिक गति धीमी हो जाती है, तो मल बड़ी आंत में अधिक समय तक रुकता है और सख्त हो जाता है। इसके पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हो सकते हैं।
खान-पान से जुड़े कारण
फाइबर की कमी कब्ज का सबसे आम कारण मानी जाती है। फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और सलाद जैसे फाइबर-युक्त खाद्य पदार्थ मल को नरम रखते हैं और आंतों की गति को बेहतर बनाते हैं। इसके विपरीत, जंक फूड, तली-भुनी चीज़ें और मैदा से बने खाद्य पदार्थ पाचन को धीमा कर देते हैं। इसके अलावा, पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से भी मल सूख जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।
जीवनशैली से जुड़े कारण
शारीरिक गतिविधि की कमी भी कब्ज का एक महत्वपूर्ण कारण है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, व्यायाम न करना और निष्क्रिय जीवनशैली आंतों की प्राकृतिक क्रिया को प्रभावित करती है। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना और भोजन के समय में गड़बड़ी भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालती है।
व्यवहार और आदतों से जुड़े कारण
मल त्याग की इच्छा को बार-बार रोकना कब्ज को जन्म दे सकता है। ऐसा करने से आंतों की संवेदनशीलता कम हो जाती है और धीरे-धीरे मल त्याग की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। इसके अलावा, लगातार तनाव, चिंता और मानसिक दबाव भी पाचन तंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।
अन्य कारण
कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन, उम्र बढ़ने के साथ पाचन शक्ति का कमजोर होना, हार्मोनल बदलाव और कुछ स्वास्थ्य स्थितियाँ भी कब्ज का कारण बन सकती हैं। इसलिए कब्ज को केवल अस्थायी परेशानी मानने के बजाय इसके मूल कारणों को समझना और उन्हें दूर करना ज़रूरी है।
कब्ज के प्रकार (Types of Constipation)
कब्ज सभी लोगों में एक जैसी नहीं होती। इसके स्वरूप, अवधि और कारणों के आधार पर इसे अलग-अलग प्रकारों में बाँटा जा सकता है। कब्ज के प्रकार को समझना इसलिए ज़रूरी है, ताकि सही समय पर उचित उपाय और उपचार किया जा सके।
अस्थायी कब्ज (Temporary Constipation)
यह कब्ज का सबसे सामान्य प्रकार है, जो कुछ दिनों के लिए होती है। आमतौर पर खान-पान में बदलाव, यात्रा, दिनचर्या बिगड़ने, पानी कम पीने या तनाव के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है। जीवनशैली और आहार में सुधार करने से यह कब्ज अपने आप ठीक हो सकती है।
दीर्घकालिक या क्रॉनिक कब्ज (Chronic Constipation)
जब कब्ज की समस्या कई हफ्तों या महीनों तक बनी रहती है, तो इसे दीर्घकालिक कब्ज कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को नियमित रूप से मल त्याग में कठिनाई होती है और बार-बार ज़ोर लगाना पड़ता है। यह स्थिति किसी अंतर्निहित पाचन समस्या, गलत जीवनशैली या लंबे समय तक दवाइयों के सेवन का संकेत हो सकती है।
बच्चों में कब्ज
बच्चों में कब्ज आमतौर पर आहार में फाइबर की कमी, पानी कम पीने या शौच की आदतों में बदलाव के कारण होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों में शौच की इच्छा को रोकना भी एक आम कारण है, जिससे धीरे-धीरे कब्ज की समस्या विकसित हो सकती है।
बुज़ुर्गों में कब्ज
उम्र बढ़ने के साथ पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है। शारीरिक गतिविधि में कमी, कई दवाइयों का सेवन और आहार में बदलाव बुज़ुर्गों में कब्ज को आम बना देते हैं। इस आयु वर्ग में कब्ज पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।
गर्भावस्था में कब्ज
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव और बढ़ते गर्भाशय के दबाव के कारण पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कब्ज की समस्या हो सकती है। यह आम है, लेकिन उचित आहार और सावधानियों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
कब्ज के प्रकार को समझकर व्यक्ति अपनी स्थिति के अनुसार सही उपाय अपना सकता है और जटिलताओं से बच सकता है।
कब्ज से होने वाली समस्याएँ (Complications of Constipation)
कब्ज को अक्सर एक सामान्य और अस्थायी समस्या मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन यदि यह लंबे समय तक बनी रहे तो इससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। लगातार सख्त मल और ज़ोर लगाकर मल त्याग करने की आदत शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
सबसे आम समस्या बवासीर (पाइल्स) है। बार-बार ज़ोर लगाने से गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे वे सूज जाती हैं और दर्द, जलन या खून आने जैसी शिकायत हो सकती है। इसी तरह, सख्त मल के कारण गुदा में दरार पड़ सकती है, जिसे एनल फिशर कहा जाता है। यह स्थिति अत्यधिक दर्दनाक हो सकती है और मल त्याग के दौरान तेज जलन महसूस होती है।
लंबे समय तक कब्ज रहने पर पेट में लगातार भारीपन, गैस और दर्द की समस्या बनी रह सकती है। इससे पाचन तंत्र की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और भोजन से पोषक तत्वों का अवशोषण भी ठीक से नहीं हो पाता। कुछ मामलों में कब्ज के कारण व्यक्ति की भूख कम हो जाती है और कमजोरी या थकान महसूस होने लगती है।
गंभीर स्थितियों में, मल आंतों में जमा होकर कठोर हो सकता है, जिससे आंतों में अवरोध जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा, कब्ज से जुड़ी असहजता व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों, काम करने की क्षमता और मानसिक स्थिति पर भी असर डाल सकती है।
इसलिए कब्ज को केवल असुविधा समझकर अनदेखा करना ठीक नहीं है। समय रहते इसका समाधान करना ज़रूरी है, ताकि भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा जा सके और पाचन तंत्र स्वस्थ बना रहे।
कब्ज के घरेलू उपाय (Home Remedies for Constipation)
कब्ज की समस्या को शुरुआती अवस्था में घरेलू उपायों और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलावों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ये उपाय प्राकृतिक, सुरक्षित और लंबे समय तक पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं।
आहार से जुड़े घरेलू उपाय
फाइबर युक्त आहार कब्ज से राहत दिलाने में सबसे प्रभावी माना जाता है। फल जैसे पपीता, नाशपाती, सेब और अमरूद मल को नरम बनाते हैं और आंतों की गति को बेहतर करते हैं। हरी सब्ज़ियाँ, सलाद, दलिया, ओट्स और साबुत अनाज भी पाचन के लिए लाभकारी होते हैं। दही और छाछ जैसे प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाकर पाचन को सुधारते हैं।
प्राकृतिक और पारंपरिक उपाय
सुबह खाली पेट एक या दो गिलास गुनगुना पानी पीना आंतों को सक्रिय करता है और मल त्याग को आसान बनाता है। त्रिफला चूर्ण का सीमित मात्रा में सेवन पाचन तंत्र को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। इसी तरह, इसबगोल को गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से मल नरम होता है और कब्ज से राहत मिलती है।
जीवनशैली से जुड़े उपाय
नियमित शारीरिक गतिविधि कब्ज से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रोज़ाना टहलना, हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम आंतों की क्रिया को तेज करते हैं। इसके साथ ही, शौच की नियमित आदत डालना और मल त्याग की इच्छा को रोकने से बचना भी आवश्यक है।
इन घरेलू उपायों को अपनाकर अधिकांश लोग बिना दवा के ही कब्ज की समस्या से राहत पा सकते हैं। हालांकि, यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी होता है।
कब्ज में क्या खाएँ और क्या न खाएँ
कब्ज की समस्या में सही आहार का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को सक्रिय कर मल त्याग को आसान बनाते हैं, जबकि कुछ चीज़ें कब्ज को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि कब्ज में क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से परहेज़ करना चाहिए।
कब्ज में क्या खाएँ
फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ कब्ज से राहत दिलाने में सहायक होते हैं। ताज़े फल जैसे पपीता, नाशपाती, सेब, संतरा और अंजीर मल को नरम बनाते हैं। हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, गाजर, लौकी, तोरी और बीन्स जैसी सब्ज़ियाँ पाचन के लिए लाभकारी होती हैं। साबुत अनाज, दलिया, ओट्स और ब्राउन राइस आंतों की गति को बेहतर करते हैं। इसके अलावा, दही और छाछ जैसे प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
कब्ज में क्या न खाएँ
कब्ज की स्थिति में तली-भुनी और अधिक मसालेदार चीज़ों से बचना चाहिए, क्योंकि ये पाचन को धीमा कर देती हैं। मैदा से बनी चीज़ें, फास्ट फूड, पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कब्ज को बढ़ा सकते हैं। अत्यधिक चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक का सेवन भी शरीर में पानी की कमी पैदा कर सकता है, जिससे मल और अधिक सख्त हो जाता है।
संतुलित और फाइबर युक्त आहार अपनाकर, साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर, कब्ज की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बच्चों और बुज़ुर्गों में कब्ज
कब्ज की समस्या उम्र के अनुसार अलग-अलग कारणों से उत्पन्न हो सकती है। बच्चों और बुज़ुर्गों में पाचन तंत्र की ज़रूरतें और कार्यप्रणाली अलग होती है, इसलिए इन दोनों आयु वर्गों में कब्ज पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है।
बच्चों में कब्ज
बच्चों में कब्ज आमतौर पर गलत खान-पान और आदतों के कारण होती है। फाइबर युक्त भोजन की कमी, पानी कम पीना और शौच की इच्छा को रोकना इसके प्रमुख कारण हैं। स्कूल जाने वाले बच्चे कई बार समय या संकोच के कारण शौच को टाल देते हैं, जिससे धीरे-धीरे कब्ज की समस्या विकसित हो जाती है। इसके अलावा, ठोस आहार की शुरुआत के समय छोटे बच्चों में भी कब्ज देखी जा सकती है। बच्चों के आहार में फल, सब्ज़ियाँ, पर्याप्त तरल पदार्थ और नियमित दिनचर्या शामिल करने से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बुज़ुर्गों में कब्ज
बुज़ुर्गों में कब्ज एक आम समस्या है, जिसका मुख्य कारण पाचन तंत्र की गति का धीमा हो जाना होता है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे आंतों की क्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा, कई प्रकार की दवाइयों का सेवन, पानी कम पीना और आहार में फाइबर की कमी भी बुज़ुर्गों में कब्ज को बढ़ा सकती है। इस आयु वर्ग में हल्का व्यायाम, संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या बनाए रखना विशेष रूप से ज़रूरी होता है।
बच्चों और बुज़ुर्गों में कब्ज को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय रहते ध्यान न देने पर यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। सही देखभाल और आहार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें
कब्ज आमतौर पर घरेलू उपायों और जीवनशैली में सुधार से ठीक हो जाती है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसे नज़रअंदाज़ करना नुकसानदायक हो सकता है। यदि कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ कुछ गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक हो जाता है।
अगर किसी व्यक्ति को कई हफ्तों तक लगातार कब्ज बनी रहे और घरेलू उपायों से कोई राहत न मिले, तो यह किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। मल त्याग के दौरान तेज दर्द होना, बार-बार खून आना, या गुदा क्षेत्र में गंभीर जलन जैसे लक्षण गंभीर माने जाते हैं और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
इसके अलावा, बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक वजन कम होना, लगातार थकान महसूस होना, पेट में असामान्य सूजन या तेज दर्द होना भी चिंता का विषय हो सकता है। बच्चों और बुज़ुर्गों में यदि कब्ज लगातार बनी रहे या उनके व्यवहार और स्वास्थ्य पर असर डालने लगे, तो भी विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है।
समय पर डॉक्टर से संपर्क करने से सही कारण का पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है, जिससे भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।
कब्ज से बचाव के उपाय (Prevention Tips)
कब्ज से बचाव इलाज से बेहतर माना जाता है। रोज़मर्रा की आदतों और जीवनशैली में कुछ सरल लेकिन प्रभावी बदलाव अपनाकर कब्ज की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है और पाचन तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
सबसे पहले संतुलित और फाइबर युक्त आहार को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। रोज़ाना फल, सब्ज़ियाँ, साबुत अनाज और सलाद का सेवन आंतों की गति को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, शरीर की ज़रूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि पानी की कमी से मल सख्त हो जाता है।
नियमित शारीरिक गतिविधि भी कब्ज से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रोज़ाना टहलना, हल्का व्यायाम, योग या प्राणायाम आंतों को सक्रिय रखते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचना चाहिए और काम के बीच-बीच में थोड़ा चलना-फिरना फायदेमंद होता है।
शौच की नियमित आदत विकसित करना भी आवश्यक है। मल त्याग की इच्छा को दबाने से बचें और रोज़ एक निश्चित समय पर शौच जाने की कोशिश करें। इसके अलावा, तनाव को नियंत्रित करना, पर्याप्त नींद लेना और अनियमित जीवनशैली से बचना भी कब्ज के जोखिम को कम करता है।
इन सरल उपायों को अपनाकर न केवल कब्ज से बचाव किया जा सकता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत बनाकर समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर रखा जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
कब्ज एक आम पाचन समस्या है, लेकिन इसे मामूली समझकर नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। गलत खान-पान, अनियमित जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण यह समस्या आज हर आयु वर्ग में देखने को मिल रही है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो कब्ज आगे चलकर बवासीर, एनल फिशर और अन्य पाचन संबंधी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
अच्छी बात यह है कि अधिकतर मामलों में कब्ज को संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और सही दिनचर्या अपनाकर आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। घरेलू उपाय और प्राकृतिक तरीक़े न केवल राहत देते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करते हैं।
यदि कब्ज लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है। सही समय पर किया गया उपचार और जीवनशैली में सुधार पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और जीवन की गुणवत्ता को भी सुधारता है। स्वस्थ पाचन तंत्र ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला है।






