राजस्थान की चिलचिलाती गर्मी से परेशान लोगों के लिए अब राहत की खबर है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 17 जून से लेकर 20 जून के बीच राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश की संभावना जताई गई है। लंबे समय से गर्मी और लू से जूझ रहे प्रदेशवासियों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि इन बारिशों के साथ न केवल तापमान में गिरावट आएगी, बल्कि मानसून की औपचारिक शुरुआत भी मानी जा रही है।
पिछले कुछ हफ्तों से राजस्थान में तापमान 45 डिग्री से ऊपर बना हुआ था। विशेषकर पश्चिमी जिलों जैसे बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर में स्थिति बेहद गंभीर थी, जहां दिन में सड़कें धधक रही थीं और रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही थी। लेकिन अब दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी बढ़त के साथ ही राज्य का मौसम करवट लेने जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से आने वाली नम हवाओं का असर राजस्थान में जल्द ही दिखाई देने लगेगा।
जयपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, सीकर, झुंझुनूं और अलवर जैसे जिलों में भारी से मध्यम बारिश के संकेत हैं। इस दौरान आसमान में घने बादल छाए रहेंगे, तेज हवाएं चलेंगी और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है, ताकि प्रशासन और नागरिक पहले से सतर्क रहें।
राजधानी जयपुर में 18 और 19 जून को खासतौर पर तेज बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। नगर निगम पहले से नालों की सफाई और जलभराव से निपटने की तैयारियों में जुट गया है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में किसान वर्ग इस बारिश की शुरुआत का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि बारिश समय पर होती है, तो फसलों की अच्छी शुरुआत हो सकती है, जो अंततः प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सहारा देगी।
हालांकि इस बारिश के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। कई जिलों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बिजली आपूर्ति में बाधाएं देखी जा सकती हैं। बिजली विभाग और नगर निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि बारिश से पहले ही जरूरी तैयारी पूरी कर ली जाए, ताकि जनजीवन प्रभावित न हो। साथ ही, लोगों से भी अपील की गई है कि मौसम के बदले मिजाज को ध्यान में रखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें और खराब मौसम में घर के अंदर ही रहें।
राजस्थान के मौसम में यह बदलाव केवल एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह मानसून के व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ने का संकेत भी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मानसून का आगमन सामान्य तिथि के आसपास ही हो रहा है, और इसके पहले चरण में राजस्थान के लगभग 60% हिस्से को कवर कर लिया जाएगा। आने वाले दिनों में पूर्वी राजस्थान से लेकर पश्चिमी हिस्सों तक धीरे-धीरे बारिश का दायरा बढ़ेगा और जून के अंतिम सप्ताह तक राज्य भर में मानसून सक्रिय हो जाएगा।
यह बात भी उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में मौसम में अनियमितता, कभी देर से आने वाला मानसून और कभी अत्यधिक बारिश जैसी स्थितियों ने प्रदेश की जलवायु प्रणाली को अस्थिर किया है। ऐसे में समय पर होने वाली और संतुलित बारिश को शुभ संकेत माना जा रहा है। इस बार कृषि विभाग ने भी किसानों को मानसून के पहले ही बीज वितरण और तकनीकी सलाह देना शुरू कर दिया है, ताकि बारिश का पूरा लाभ उठाया जा सके।
इधर पर्यटन से जुड़े कारोबारियों के लिए भी यह बारिश वरदान साबित हो सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ ही माउंट आबू, कुंभलगढ़, रणकपुर, उदयपुर और बूंदी जैसे हिल-स्टेशन और हरे-भरे क्षेत्रों में पर्यटकों की आमद बढ़ जाती है। कई होटल और रिसॉर्ट्स ने इस सीज़न के लिए विशेष पैकेज भी लॉन्च किए हैं। अगर मानसून सही गति से आगे बढ़ता है, तो राजस्थान की पर्यटन अर्थव्यवस्था को भी नया संजीवनी मिल सकता है।
वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने भी मानसून के शुरुआती दौर में मच्छर जनित बीमारियों की संभावना को देखते हुए चौकसी बढ़ा दी है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई और जागरूकता अभियानों की शुरुआत हो चुकी है। नगर निगमों को जलजमाव रोकने और नियमित फॉगिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बार की बारिश केवल मौसम में बदलाव नहीं, बल्कि उम्मीदों की बौछार बनकर आई है—जहां किसान नई फसल की तैयारी में जुटेंगे, जहां पर्यटक मानसून की ठंडी हवाओं में सैर करेंगे और जहां आमजन को तपती गर्मी से राहत मिलेगी। यह एक सामूहिक उत्सव की तरह है, जिसे प्रदेशवासी लंबे समय से महसूस करना चाहते थे।








