राजस्थान में मौसम ने मंगलवार को अचानक करवट ले ली और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय प्रभाव के कारण राज्य के कई हिस्सों में तेज़ बारिश, ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ भारी मौसम देखा गया। इस दौरान प्रदेश के सीकर जिले की निम्मेडा गाँव में एक महिला और कोटा जिले के मंडाना गाँव में 25 वर्षीय युवक बिजली गिरने की घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। इस अप्रिय घटना ने आम लोगों और कृषि-समुदाय में चिंता की स्थिति पैदा कर दी है।
मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान के अलवर, सीकर, झुंझुनूं, भरतपुर और कई अन्य जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओले गिरने की ताकतवर गतिविधियाँ दर्ज की गईं। अलवर के राजगढ़ क्षेत्र में बिजली गिरने से एक मकान की दीवार को नुकसान पहुंचा और घर में रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलने की खबरें भी आईं, हालांकि वहाँ किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।
बादल और ओलों की यह गतिविधि अब बस मौसम-उत्सव भर नहीं है, बल्कि लोगों के दैनिक जीवन और खेती-बाड़ी पर भी सीधा असर डाल रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बारिश “रबी” फसलों जैसे गेहूँ और सरसों के लिए पहले तो लाभदायक है, लेकिन ओलावृष्टि के कारण फसल को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ओलों से सरसों के फूल और युवा पौधों को नुकसान पहुँच सकता है, जिससे उपज प्रभावित हो सकती है।
वर्षा की यह ताज़ा गतिविधि एक ‘ऑरेंज अलर्ट’ के साथ जारी है, जिसमें अलवर, बारां, भरतपुर, बूंदी, दौसा, जयपुर, झालावाड़, करौली और कोटा समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलों को लेकर मौसम विभाग ने सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है। विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफ़ानी हवाएँ चल सकती हैं, जिससे बिजली गिरने और गरज-चमक की घटनाएँ अधिक संभावित हैं।
राजस्थान राजधानी जयपुर में भी लगातार मौसम की हलचल देखी गई और वहाँ तापमान में गिरावट के साथ बारिश दर्ज की गई। राजगढ़ तथा रैणी जैसे इलाकों में तेज बारिश और हल्की ओलावृष्टि ने सर्दी को और क़हरला बना दिया है और तापमान में गिरावट के कारण लोगों को ठंड का अनुभव अधिक हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ के आगे सक्रिय रहने के कारण अगले कुछ दिनों तक इसी तरह का मौसम बने रहने की चेतावनी दी जा रही है।
प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों को सावधान रहने, खुले स्थानों पर अनावश्यक समय बिताने से बचने, और बिजली गिरने के जोखिम वाले इलाकों में सुरक्षित स्थान ढूँढने की अपील की है। बिजली गिरने जैसी घटनाओं को देखते हुए बारिश के मौसम में सुरक्षा प्राथमिकता बनी रहती है, क्योंकि ऊँचे पेड़, खुला मैदान और अलग-थलग कम संरक्षित ढाँचे बिजली के टूटने के दौरान अधिक जोखिमपूर्ण स्थान होते हैं।
मौसम का यह बदलाव राज्य में सामान्य जन जीवन, स्कूल-कॉलेजों की दिनचर्या और यातायात को भी प्रभावित कर रहा है। ओलों की गिरावट और तेज हवाओं की वजह से कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति में बाधाएँ और कुछ स्थानों पर सड़क मार्गों पर पानी भराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे प्रशासन ने यात्रा योजनाओं में सतर्कता अपनाने की सलाह दी है।
राजस्थान में अचानक मौसम बदलाव इस वर्ष सामान्य से पहले और तीव्र दिख रहा है, जिससे प्रदेश में सर्दी-विकास के साथ ही कई ज़िलों में अपेक्षित से अधिक वर्षा तथा बिजली गिरने की घटनाएँ देखी जा रही हैं। मौसम विभाग ने आगे भी कुछ दिनों तक बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम की अस्थिरता बने रहने का संकेत देते हुए सभी से जान-माल की सुरक्षा को प्राथमिकता रखने की बात कही है।
इस मौसम प्रणाली के कारण जहां लोगों को ठंड से राहत मिली है और रबी फसलों के लिए पानी का प्रबंध हुआ है, वहीं दूसरी ओर बिजली गिरने से हुई दो जानें और ओलों-तेज़ हवाओं की वजह से कृषि तथा पारिवारिक सुरक्षा पर गंभीर चिंता भी बढ़ी है। ऐसे में राज्य के लोगों और कृषि-समुदाय के लिए मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्टों को गंभीरता से लेना और सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।








