राजस्थान की तपती धरती एक बार फिर आग उगलने को तैयार है। जून की शुरुआत के साथ ही गर्म हवाओं ने अपने पैर पसार लिए हैं और मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों के अनुसार राज्य में आने वाले कुछ दिनों में तापमान 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह स्थिति अगर बनी रही, तो साल 2016 में दर्ज हुआ 51 डिग्री का भयानक रेकॉर्ड करीब सात साल बाद दोबारा टूट सकता है। इस बढ़ती गर्मी के बीच भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे आम जनता, विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
राजस्थान के पश्चिमी हिस्से, विशेषकर बाड़मेर, फलौदी, जैसलमेर और जोधपुर जैसे इलाकों में लू की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से दिन का अधिकतम तापमान 46 डिग्री के पार चल रहा है, और रातें भी राहत नहीं दे रही हैं। हवाओं में नमी की कमी, शुष्क वातावरण और तपती दोपहर मिलकर एक ऐसा वातावरण बना रहे हैं जो शरीर को झुलसा देने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार घटती हरियाली इस प्रचंड गर्मी के पीछे के मुख्य कारण हैं।
जयपुर जैसे शहरों में भी हालात सामान्य से कहीं अधिक खराब हो चुके हैं। राजधानी में पारा 45 डिग्री को पार कर चुका है और मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों में यह तापमान 47 डिग्री तक पहुंच सकता है। इसी के मद्देनज़र प्रशासन ने सभी स्कूलों की समय सारणी में परिवर्तन किया है और दोपहर बाद की कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों में किसान समुदाय इस तापमान से सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है, जहां खेतों में काम करना लगभग नामुमकिन हो चुका है।
भारत मौसम विभाग द्वारा जारी रेड अलर्ट का अर्थ यह है कि आमजन को अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह चेतावनी विशेषकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए है। डॉक्टरों की मानें तो इस तरह के मौसम में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर असंतुलन और चक्कर आने जैसी समस्याएं बहुत आम हो जाती हैं। इसलिए सभी से अपील की गई है कि दिन के समय धूप में बाहर निकलने से बचें और अधिक से अधिक पानी पिएं।
इस भीषण गर्मी का प्रभाव केवल आम जीवन पर ही नहीं, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर भी देखा जा रहा है। फल और सब्जियों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे मंडियों में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा, मजदूरी करने वाले श्रमिक वर्ग को काम मिलना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि निर्माण कार्यों और अन्य शारीरिक श्रम वाले क्षेत्रों में गर्मी के कारण प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ा है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कई आपात योजनाएं सक्रिय की हैं, जिनमें मोबाइल वाटर स्टॉल, सार्वजनिक जगहों पर वाटर कूलर की व्यवस्था और हीट स्ट्रोक सहायता केंद्र शामिल हैं।
आंकड़ों की बात करें तो 2016 में राजस्थान के चुरू और फलौदी जैसे स्थानों में 50.5 से 51 डिग्री तक तापमान दर्ज किया गया था, जो कि भारत के इतिहास में सबसे अधिक माना जाता है। इस बार का पूर्वानुमान उसी की पुनरावृत्ति की ओर संकेत कर रहा है। वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान की भूगोलिक संरचना और लगातार घटते वन क्षेत्र इस क्षेत्र को गर्मी की चरम स्थिति के लिए और भी अधिक संवेदनशील बना रहे हैं।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखते हुए सभी जिलों में चिकित्सा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। खासकर उन जिलों में जहां हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है, वहां अतिरिक्त डॉक्टरों और एंबुलेंस सेवाओं को तैनात किया गया है। गर्मी से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए अलग से वार्ड भी तैयार किए गए हैं।
वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी राजस्थान की इस चिलचिलाती गर्मी को लेकर लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोग अपने-अपने इलाकों का तापमान साझा कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि आमजन किस कदर इस स्थिति से परेशान है। कुछ ने तो मजाकिया अंदाज़ में लिखा है कि “राजस्थान में अब सिर्फ एसी नहीं, ओवन की भी ज़रूरत है।”
बात अगर समाधान की करें तो विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि इस तरह की भीषण गर्मी से निपटने के लिए केवल अल्पकालिक उपायों पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नीति और हरित विकास पर ध्यान देना होगा। वृक्षारोपण, जल स्रोतों की सुरक्षा, शहरी गर्मी को कम करने के लिए ग्रीन बिल्डिंग्स को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना ही एकमात्र समाधान है।
इस बीच, जनता से अपील की जा रही है कि वो खुद को सुरक्षित रखने के लिए मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करें। घर से बाहर निकलते समय सिर पर टोपी या छाता रखें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें। गर्मी को हल्के में लेना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, इसलिए सजग और सतर्क रहना ही इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि राजस्थान इस समय प्रकृति की एक कठिन परीक्षा से गुजर रहा है। 49 डिग्री तक तापमान पहुंचने की चेतावनी सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि हमें अब अपनी जीवनशैली और पर्यावरण नीति दोनों में गहराई से सुधार की आवश्यकता है। अगर हम समय रहते नहीं चेते, तो भविष्य में यह तापमान 50 से भी पार जाना कोई असंभव बात नहीं होगी।








