राजस्थान में प्राथमिक स्कूल के छात्रों के स्कूल बैग के भार को कम करने के लिए नई रणनीति बनाई गई है जो अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों दोनों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया ला रही है। शिक्षा विभाग ने अध्ययन किया कि भारी स्कूल बैग न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, बल्कि उनका शैक्षणिक प्रदर्शन, मनोवैज्ञानिक तनाव और रोजमर्रा की पढ़ाई में रुचि भी कम कर देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्राथमिक कक्षा तक पढ़ रहे छात्रों के बैगों का वजन काफी घटाया जाएगा, ताकि छोटे-छोटे बच्चे भारी किताबों और सामग्री से बोझिल न हों।
राजस्थान सरकार की इस नई नीति के दौरान यह स्पष्ट किया गया है कि बच्चों को केवल मुख्य विषयों की कम सामग्री ही स्कूल ले जाने को कहा जाएगा। उन्हीं किताबों का रहस्योद्घाटन होगा जो आवश्यक हैं और जिन्हें रोज़ उपयोग में लाना ज़रूरी है। इसके अलावा, आवश्यक कापियों और ड्राइंग या व्यायाम की सामग्री को भी सीमित किया जाएगा ताकि बैग में बची-खुची जगह में अनावश्यक भारी वज़न न हो। यह बदलाव शिक्षा व्यवस्था में यह समझने के बाद किया जा रहा है कि अकारण भारी बैग न केवल बच्चों के कंधों, रीढ़ और मांसपेशियों पर असर डालते हैं, बल्कि इससे उनकी रोज़ की ऊर्जा भी कम हो जाती है।
विशेषज्ञों और पेडियाट्रिशियन के अनुसार, छोटे बच्चों के लिए शारीरिक विकास बेहद संवेदनशील होता है। यदि उन्हें बहुत समय तक भारी वस्तुओं को ढोना पड़े, तो इससे उनकी हड्डियों और मस्कुलर सिस्टम पर दबाव पड़ता है, जो आगे चलकर पोस्चर या रीढ़ की हड्डी की समस्याओं में बदल सकता है। इसीलिए शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) के बच्चों की स्कूल सामग्री को प्राथमिक विषयों तक सीमित करने का निर्णय लिया है। अब से बच्चों को भारी किताबों के साथ रोज़ स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें केवल आज की पढ़ाई का आवश्यक सामग्री ही ले जाना होगा।
इस नीति से यह भी सुनिश्चित होगा कि बच्चे खेल-कूद, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बिना थकान के भाग ले सकें। स्कूल की दैनिक दिनचर्या में अब यह बदलाव देखा जाएगा कि पढ़ाई के समय के अलावा बच्चों को कहीं भारी बैग उठा कर शारीरिक थकान महसूस न हो। इसके अलावा, शिक्षा विभाग ने यह भी कहा कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी कि वे उस समय की सामग्री बच्चों को समझदारी से वितरित करें ताकि रोज़ बहुत अधिक किताबें ले जाना आवश्यक न पड़े।
राजस्थान के स्कूलों और शिक्षकों के साथ अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। छोटे बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी खेल, स्वास्थ्य और आराम को भी ध्यान में रखना आवश्यक रहा है और यह पहल बच्चों के मनोबल को भी ऊँचा रखेगी। कई अभिभावकों का कहना है कि वे अपने छोटे बच्चों को भारी बैग के साथ रोज़ाना भेजते-लाते हुए चिंतित रहते थे, लेकिन अब इस नीति से उन्हें राहत मिलेगी और बच्चों को मुफ्त खेलने तथा सही तरीके से पढ़ाई करने का समय मिलेगा।
बच्चों की सुरक्षा और आराम को प्राथमिकता देने के साथ ही यह निर्णय उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाता है। बच्चों को यह सीखने का मौका मिलेगा कि कैसे केवल ज़रूरी चीज़ों को चुनकर बैग में रखना चाहिए और अनावश्यक चीज़ों से बचना चाहिए। विद्यालयों में होने वाले वार्षिक परीक्षाओं और पाठ योजनाओं में भी अब इसी नई नीति को समायोजित किया जाएगा, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहे और बच्चों को दबाव महसूस न हो।
राजस्थान सरकार की यह पहल केवल बैग के भार को कम करने तक ही सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में शिक्षा नीतियों और पाठ्यक्रम के निर्माण में भी इस तरह के बच्चों के हितों को ध्यान में रखकर सुधार किए जाने की उम्मीद है। विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से इस बदलाव के प्रभाव का मूल्यांकन करें और यदि आवश्यक हो तो और भी सकारात्मक सुधारों का सुझाव दें।
इस बदलाव से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार बच्चों की समग्र भलाई—जो केवल शिक्षा से जुड़ा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और जीवन-प्रबंधन कौशल से जुड़ा है—को महत्व दे रही है। अब छोटे बच्चों के लिए शिक्षा सिर्फ़ कक्षा में बैठ कर सीखना नहीं रहेगा, बल्कि एक स्वस्थ, संतुलित और आनंददायक अनुभव बन सकेगा।






