केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026-27 देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता से आगे बढ़ाते हुए विकास की नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। यह बजट ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक दबाव बने हुए हैं, वहीं घरेलू स्तर पर भारत तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। बजट 2026 को सरकार ने “विकास, रोजगार और समावेशी प्रगति” का रोडमैप बताते हुए पेश किया है, जिसमें मध्यम वर्ग, किसान, युवा, महिलाएं और उद्योग सभी के लिए संतुलित घोषणाएं की गई हैं।
इस बजट में सरकार का स्पष्ट संदेश यह रहा कि आर्थिक सुधारों की निरंतरता बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा। वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ पूंजीगत खर्च को बढ़ाने पर जोर दिया गया है, ताकि बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार सृजन को सीधा लाभ मिल सके। सरकार का मानना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही दीर्घकालिक विकास की नींव है।
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय को एक बार फिर प्राथमिकता दी गई है। सड़कों, रेल, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े आवंटन की घोषणा की गई है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। खास तौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों को जोड़ने वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम हो सके।
मध्यम वर्ग के लिए बजट 2026 को राहत देने वाला माना जा रहा है। आयकर स्लैब में बदलाव और मानक कटौती में बढ़ोतरी से नौकरीपेशा और छोटे व्यवसायियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का तर्क है कि कर राहत से उपभोग बढ़ेगा, जिससे बाजार में मांग मजबूत होगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। नई कर व्यवस्था को और सरल बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं, ताकि टैक्स अनुपालन आसान हो सके।
कृषि क्षेत्र इस बजट का एक अहम स्तंभ रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सिंचाई, भंडारण और कृषि-प्रसंस्करण से जुड़ी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धन का प्रावधान किया गया है। प्राकृतिक खेती और जल-संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके। इसके साथ ही ग्रामीण सड़कों और बाजार संपर्क को बेहतर बनाने की योजनाओं से किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रोजगार और कौशल विकास बजट 2026 की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने युवाओं के लिए नए स्किल-डेवलपमेंट प्रोग्राम और इंडस्ट्री-लिंक्ड ट्रेनिंग योजनाओं की घोषणा की है। आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और हेल्थ सेक्टर में विशेष रोजगार अवसर पैदा करने की रणनीति अपनाई गई है। स्टार्टअप और एमएसएमई सेक्टर के लिए सस्ती वित्तीय सहायता और क्रेडिट गारंटी को मजबूत करने का भी ऐलान किया गया है, ताकि छोटे उद्यम रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभा सकें।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट 2026 को दीर्घकालिक निवेश वाला बजट कहा जा रहा है। स्कूलों और उच्च शिक्षा संस्थानों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नई योजनाएं लाई गई हैं। रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त फंड का प्रावधान किया गया है, जिससे भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाया जा सके। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कॉलेजों और डिजिटल हेल्थ मिशन को और विस्तार देने पर जोर दिया गया है।
महिला सशक्तिकरण भी इस बजट का एक अहम पहलू रहा है। महिला उद्यमियों के लिए विशेष क्रेडिट योजनाएं, स्वयं सहायता समूहों के लिए अतिरिक्त सहायता और कार्यस्थल पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नई पहल की गई हैं। सरकार का कहना है कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी तो समग्र विकास को गति मिलेगी।
बजट 2026 में ग्रीन एनर्जी और जलवायु परिवर्तन से निपटने पर भी खास ध्यान दिया गया है। सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए निवेश बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने और ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की घोषणाएं की गई हैं। सरकार का उद्देश्य है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन भी बना रहे और भारत वैश्विक स्तर पर जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभाए।
डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कई अहम कदम उठाए गए हैं। डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की बात कही गई है। सरकारी सेवाओं को और अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए नई तकनीकी पहल की घोषणा की गई है, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राजकोषीय मोर्चे पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने का रास्ता जारी रहेगा। कर संग्रह बढ़ाने, सब्सिडी को लक्षित करने और खर्च की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संतुलन बनाए रखने की कोशिश विदेशी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 को एक संतुलित और भविष्य-उन्मुख बजट माना जा रहा है। इसमें अल्पकालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक विकास की नींव रखने की कोशिश दिखाई देती है। जहां मध्यम वर्ग और किसानों को राहत दी गई है, वहीं उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी में निवेश से आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घोषित योजनाओं को समयबद्ध और प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो बजट 2026 भारत को उच्च विकास पथ पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बजट जमीनी स्तर पर कितना असर डालता है और आम नागरिकों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है।











