आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक नया राजनीतिक विवाद उभर कर सामने आया है, जहां यानगु प्रदेश कांग्रेस पार्टी (YCP) ने जनसेना पार्टी (JSP) के विधायक अरावा श्रीधर के खिलाफ एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसे लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस चल रही है। यह मामला अब दोनों दलों के बीच मतभेद को और गहरा कर रहा है।
YCP की ओर से साझा किए गए इस वीडियो को पार्टी की सोशल मीडिया टीम ने प्रमुखता से प्रचारित किया है, जिसमें दावा किया गया है कि रेलवे कोडुरु से जुड़े जनसेना के विधायक अरावा श्रीधर ने एक महिला कर्मचारी का शारीरिक रूप से शोषण किया और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया गया। YCP ने आरोप लगाया है कि विधायक ने अपनी राजनीतिक शक्ति का उपयोग कर कथित रूप से महिला को परेशान किया, उसे धमकाया और उसके परिवार पर नकारात्मक ढंग से दबाव बनाया। वीडियो को YCP के समूहों और प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से शेयर किया गया है।
आरोपी विधायक अरावा श्रीधर पर एक महिला की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उसे गर्भवती बनाया गया, उसके बच्चे को खतरे की चेतावनी दी गई, और अंततः गर्भपात के लिए भी मजबूर किया गया। इस तरह के गंभीर आरोप ने राजनीतिक माहौल को और भी अधिक नाटकीय और संवेदनशील बना दिया है। YCP की इस हरकत को देखते हुए सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और मामले को लेकर जनता के बीच तीखी प्रतिक्रिया भी दर्ज की जा रही है।
जबकि YCP ने वीडियो और आरोपों को सार्वजनिक किया है, वहीं जनसेना के विधायक अरावा श्रीधर ने इन आरोपों का categorically खंडन किया है और कहा है कि यह पूरा मामला राजनीतिक साज़िश और उनके विरुद्ध मानहानि फैलाने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वायरल हो रहा वीडियो डीप-फेक तकनीक का उत्पात है और इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार वे इस मामले के खिलाफ कानूनी रूप से लड़ेंगे और न्यायालय में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे।
विधायक श्रीधर ने मीडिया से बात करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने तीन साल तक पंचायत सर्वपंच के रूप में सेवा की है और उस अवधि में किसी भी तरह की शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। उन्होंने दावा किया कि पिछले लगभग छह महीनों से वह लगातार ऐसा उत्पीड़न झेल रहे हैं, और उनकी माँ ने पहले ही इस मुद्दे को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जनसेना की ओर से यह भी कहा गया है कि आरोपों के पीछे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित व्यक्तिगत हमले शामिल हो सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह मामला सिर्फ एक वीडियो से कहीं आगे बढ़कर राजनीतिक रणनीति, प्रतिद्वंदिता और मीडिया-प्रभाव के बीच की जटिल साझेदारी को दर्शाता है। सोशल मीडिया के ज़रिये वायरल आरोपों ने विवाद को बहुत बड़ा रूप दे दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वीडियो असली है या डीप-फेक जैसा मनगढ़ंत कंटेंट जिसे राजनीतिक लाभ के लिए प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे मामलों में फोरेंसिक सत्यापन, पोलीस जांच और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारत में राजनीति में “हनी-ट्रैप” और वायरल वीडियो का मुद्दा पहले भी सुर्खियों में रहा है, जहाँ उच्च-प्रोफ़ाइल नेताओं को फंसाने के लिए ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसे मामलों में कभी-कभी आरोप सिद्ध होते हैं और कभी-कभी आरोपी स्वयं को बेलाग तंत्र द्वारा निर्मित झूठ बताते हैं। इसलिए राजनीतिक विवाद के बीच इस मामले की स्वतंत्र जांच और साक्ष्यों की पुष्टि बेहद आवश्यक है।
जनसेना और YCP दोनों ही पार्टियों के समर्थकों और विरोधियों ने सोशल मीडिया पर इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ लोग इस तरह की सार्वजनिक शैली को राजनीतिक युद्ध का नया रूप मान रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक अखाड़े में व्यक्तिगत मुद्दों का अपमानजनक प्रयोग कह रहे हैं। जैसे-जैसे यह मामला आगे बढ़ रहा है, पुलिस और न्यायिक जांच की कार्रवाई आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जिससे स्पष्ट होगा कि आरोपों का आधार कितना मजबूत है और क्या ये वास्तव में निर्वाचन और राजनीतिक दबाव की राजनीति से जुड़ा मामला है।
कुल मिलाकर यह विवाद आंध्र प्रदेश में सत्ता-संगर्ष की नई बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें एक तरफ YCP की तेज़ी से फैलती सोशल मीडिया रणनीति है और दूसरी तरफ जनसेना-विधायक का अपनी प्रतिष्ठा बचाने का संघर्ष। अब इसका परिणाम क्या निकलेगा, यह आने वाले पुलिस जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और राजनीतिक बयानबाज़ियों पर निर्भर करेगा।








