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Sunday, February 1, 2026 6:31 pm

शनि देव को क्यों अर्पित करते हैं सरसों का तेल, जानिए धार्मिक कारण

हिंदू धर्म में देवताओं की पूजा विशेष विधि और सामग्री के साथ की जाती है। प्रत्येक देवता को भिन्न-भिन्न वस्तुएँ अर्पित की जाती हैं, जिनका गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व होता है। इन्हीं में से एक है शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करना। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए सरसों के तेल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी पूरे श्रद्धा भाव से निभाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे का असली धार्मिक कारण क्या है? चलिए इसे सरल भाषा में विस्तार से समझते हैं।

शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है। वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। अगर किसी ने अच्छे कर्म किए हैं तो शनि देव उसे उन्नति, समृद्धि और सुख देते हैं। वहीं यदि कोई व्यक्ति बुरे कर्मों में लिप्त रहा है तो शनि देव उसे दंड भी देते हैं। इसलिए उन्हें ‘कर्मों के दंडदाता’ भी कहा जाता है। शनि की दृष्टि बहुत प्रभावशाली मानी जाती है। यदि किसी व्यक्ति पर शनि की टेढ़ी नजर पड़ जाए तो उसके जीवन में अनेक कठिनाइयाँ आ सकती हैं। इसी कारण लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा करते हैं।

सरसों का तेल शनि देव को विशेष प्रिय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि तेल में एक विशेष ऊर्जा होती है जो नकारात्मकता को समाप्त करती है। जब सरसों का तेल चढ़ाया जाता है, तो यह व्यक्ति के जीवन से दोष, बुरे ग्रहों के प्रभाव और शनि की क्रूर दृष्टि को दूर करने में सहायक होता है। सरसों का तेल अर्पण करने से शनि देव का कोप शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

एक धार्मिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक साधक ने शनि देव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। तपस्या के बाद जब शनि देव प्रकट हुए, तो साधक ने प्रार्थना की कि आम लोगों के लिए भी सरल उपाय हों जिससे वे शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें। तब शनि देव ने कहा कि जो व्यक्ति उन्हें सरसों के तेल से अभिषेक करेगा, उसके सभी दोष समाप्त होंगे और जीवन में शांति तथा सफलता मिलेगी। तभी से सरसों के तेल का महत्व शनि पूजा में बढ़ गया।

यह भी माना जाता है कि सरसों का तेल शनि देव के स्वभाव के अनुकूल है। शनि देव को गंभीरता, शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। सरसों का तेल इन गुणों का प्रतिनिधित्व करता है। जब इसे दीपक में जलाया जाता है या प्रतिमा पर अर्पित किया जाता है, तो वातावरण में एक विशेष प्रकार की सकारात्मकता उत्पन्न होती है, जो व्यक्ति के जीवन पर शुभ प्रभाव डालती है।

शनि देव के साथ लोहे का भी विशेष संबंध है। जैसा कि सरसों का तेल लोहे के पात्र में अर्पित किया जाता है, यह और भी अधिक शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन के कष्ट कम होते हैं और शनि की दशा में सुधार होता है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल अर्पित करना विशेष लाभकारी होता है। इससे विशेष रूप से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में राहत मिलती है।

एक और मान्यता के अनुसार, सरसों के तेल में व्यक्ति की छाया देखने से शनि के दोष कम होते हैं। इस प्रक्रिया को ‘छाया दान’ कहा जाता है। ऐसा करते समय व्यक्ति अपने पापों को पहचानता है और शनि देव से क्षमा याचना करता है। इससे आत्मा का शुद्धिकरण होता है और मन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

सरसों का तेल अर्पित करने का एक वैज्ञानिक पक्ष भी है। सरसों के तेल में ऐसे तत्व होते हैं जो वातावरण को शुद्ध करते हैं। जब शनि देव की पूजा के दौरान सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है, तो यह न केवल आध्यात्मिक वातावरण बनाता है बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाता है। पुराने समय में कहा जाता था कि यदि घर में सरसों के तेल का दीपक नियमित रूप से जलाया जाए तो बुरी शक्तियाँ दूर रहती हैं और मानसिक तनाव कम होता है।

शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की एक और दिलचस्प वजह है कि सरसों का तेल काले रंग का प्रतीक माना जाता है और काला रंग शनि का प्रिय रंग है। शनि ग्रह को काले रंग से जोड़कर देखा जाता है क्योंकि यह गंभीरता, गहराई और रहस्य का संकेत देता है। इसलिए जब भक्त सरसों का तेल चढ़ाते हैं, तो वे शनि देव के स्वभाव के अनुरूप आचरण करते हैं और इस प्रकार उनका आशीर्वाद पाने की संभावना बढ़ जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में यह भी कहा गया है कि शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाने से व्यक्ति को अद्भुत मानसिक शांति मिलती है। अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से श्रद्धापूर्वक शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करता है, तो उसके जीवन के संकट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और उसे जीवन में स्थिरता तथा सफलता प्राप्त होती है। साथ ही, व्यक्ति का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और कार्यों में सफलता मिलती है।

कई ज्योतिषी यह भी बताते हैं कि जिनकी कुंडली में शनि दोष होता है या जिनका शनि कमजोर होता है, उन्हें नियमित रूप से शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल अर्पित करना चाहिए। इससे ग्रहों के दोष शांत होते हैं और व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

ग्रामीण इलाकों में आज भी एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जिसमें शनिवार को गरीबों और जरूरतमंदों को सरसों का तेल दान किया जाता है। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और शनि देव की कृपा बरसती है। दान को शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना गया है।

अगर किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार रुकावटें आ रही हों, कार्यों में असफलता मिल रही हो, मानसिक तनाव बढ़ रहा हो, या किसी प्रकार की अदृश्य बाधा महसूस हो रही हो, तो उसे शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि देव से प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही, शनि देव के मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे न केवल जीवन में स्थिरता आती है, बल्कि सकारात्मक सोच भी विकसित होती है।

शनि देव की पूजा में विनम्रता और श्रद्धा का विशेष महत्व है। बिना लोभ या भय के, यदि व्यक्ति शुद्ध हृदय से शनि देव का स्मरण करता है और सरसों का तेल अर्पित करता है, तो निश्चित ही उसे उनके दिव्य आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। शनि देव केवल दंड के देवता नहीं हैं, वे न्याय के देवता हैं जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि आपके कर्म अच्छे हैं, और आप शुद्ध मन से शनि देव की आराधना करते हैं, तो शनि देव आपकी हर बाधा को दूर कर सकते हैं और आपके जीवन को खुशियों से भर सकते हैं।

अंत में यही कहा जा सकता है कि शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में संतुलन, न्याय, और सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने का एक शक्तिशाली साधन भी है। यह श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, जो व्यक्ति को आत्म-शुद्धि की ओर प्रेरित करता है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की राह प्रशस्त करता है।

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