अमेरिकी टेक दिग्गज Oracle ने 2026 में बड़े स्तर पर छंटनी कर आईटी सेक्टर को झटका दिया है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, कंपनी ने भारत में करीब 12,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह संख्या लगभग 30,000 तक बताई जा रही है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दुनिया भर में टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन पर तेजी से निवेश कर रही हैं, और उसी के अनुरूप अपने वर्कफोर्स को पुनर्गठित कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों को अचानक सुबह करीब 6 बजे ईमेल भेजकर सूचित किया गया कि उनकी भूमिका समाप्त कर दी गई है। कई कर्मचारियों के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा था क्योंकि नोटिस मिलने के साथ ही उनका अंतिम कार्य दिवस भी तय कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने भारत के आईटी सेक्टर में अस्थिरता और नौकरी सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
Oracle के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण कंपनी की AI रणनीति को माना जा रहा है। कंपनी बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही है, जिसके लिए भारी पूंजी की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Oracle का यह कदम “कॉस्ट कटिंग” और “रिसोर्स री-अलाइनमेंट” का हिस्सा है। यानी कंपनी पारंपरिक भूमिकाओं को कम करके AI आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन पर ज्यादा निर्भर होना चाहती है।
यह भी सामने आया है कि कंपनी ने अपने 2026 के पुनर्गठन (restructuring) के लिए अरबों डॉलर का बजट तय किया है, जिससे संकेत मिलता है कि आगे भी छंटनी जारी रह सकती है।
दरअसल, Oracle का फोकस अब तेजी से AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर है। कंपनी OpenAI जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए डेटा सेंटर तैयार कर रही है, जिसमें भारी निवेश किया जा रहा है।
इस निवेश का सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा है। जिन भूमिकाओं को AI या ऑटोमेशन से बदला जा सकता है, उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित माना जा रहा है।
टेक इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह केवल Oracle तक सीमित नहीं है। 2026 में Meta, Amazon और अन्य बड़ी कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी की है, जो इस बात का संकेत है कि पूरी इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है।
भारत के संदर्भ में देखें तो यह खबर और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि Oracle यहां एक बड़ा आईटी नियोक्ता रहा है। हजारों कर्मचारियों की एक साथ नौकरी जाने से जॉब मार्केट पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर मिड-लेवल और टेक्निकल प्रोफाइल्स में।
सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। कई प्रभावित कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति साझा की है, जहां उन्होंने अचानक नौकरी जाने को “शॉकिंग” और “अनपेक्षित” बताया है।
कुछ विशेषज्ञ इसे “AI डिसरप्शन” का शुरुआती संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम करने की दिशा में बढ़ेंगी, जिससे पारंपरिक नौकरियों की संख्या घट सकती है।
हालांकि, दूसरी तरफ कुछ विश्लेषकों का मानना है कि AI नई नौकरियां भी पैदा करेगा, लेकिन इसके लिए स्किल्स का बदलाव जरूरी होगा।
Oracle की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि यह छंटनी का अंतिम चरण नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले कुछ हफ्तों में एक और राउंड की छंटनी हो सकती है।
यह स्थिति आईटी प्रोफेशनल्स के लिए एक चेतावनी भी है कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में लगातार स्किल अपडेट करना जरूरी हो गया है।
कुल मिलाकर, Oracle की यह छंटनी केवल एक कंपनी का फैसला नहीं, बल्कि पूरे टेक सेक्टर में चल रहे बड़े बदलाव का हिस्सा है।
अब यह देखना अहम होगा कि क्या यह ट्रेंड आगे और तेज होता है या कंपनियां नए अवसरों के जरिए रोजगार संतुलन बनाने में सफल रहती हैं।










