कर्नाटक हाईकोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनी WinZo और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Zo Private Limited (ZO) के बीच चल रहे विवाद में एक महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किया है, जो Enforcement Directorate (ED) के तहत लगे धनशोधन (PMLA) जांच के चलते फंसे खातों से जुड़ा हुआ है। अदालत ने ZO से कहा है कि वह अपने कर्मचारियों के नाम, पदनाम और बैंक खाते के विवरण ED को सुपुर्द करे, ताकि कोर्ट आगे यह तय कर सके कि सहायक कंपनी के फ्रीज खातों में से वेतन का भुगतान किया जा सके या नहीं।
यह मामला उस समय उजागर हुआ जब ZO ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उसने ₹193 करोड़ के被冻结 खातों को डी-फ्रीज (खोलने) की interim राहत मांगी थी। यह बैंक खाता ED द्वारा पहले लगाए गए जांच आदेश (ECIR) के तहत जब्त किया गया है, जो WinZo के खिलाफ जांच की प्रक्रिया का हिस्सा है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यह सुनवाई फिलहाल सीमित रूप से ZO के कर्मचारी वेतन और रोज़मर्रा के क़र्ज़ों के निपटारे के संदर्भ में की जा रही है, न कि पूरे खाते को खोलने के लिए।
कोर्ट ने माना कि जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि किन-किन कर्मचारियों को वेतन देना है और किस बैंक खाते से भुगतान होना है, तब तक ADJUDGE प्रस्तावित द्वारा संपत्ति मुक्त करना उचित नहीं होगा। इसी कारण ZO के वकील को निर्देश दिया गया कि आवश्यक विवरण और कर्मचारी विवरण ED को ई-मेल के माध्यम से तत्काल भेजे जाएँ, ताकि अगली सुनवाई में ED अपनी दलील रख सके। अदालत ने मामले को 29 जनवरी 2026 को फिर से सुना तय किया है।
ED ने इस पूरे विवाद में यह दलील दी है कि ZO के खाते से वेतन भुगतान की मांग अनुचित है, क्योंकि उसके खाते में मौजूद धन राशि का स्रोत और वास्तविक खर्चों की प्रकृति स्पष्ट नहीं है। ED ने यह भी दावा किया है कि WinZo के खाते से जो धन ZO में ट्रांसफर हुआ था वह आर्थिक अनियमितताओं और नेटवर्क के माध्यम से अवैध लाभ अर्जित करने के आरोपों के संदर्भ में फंसा हुआ है। इसमें Allegation यह भी शामिल है कि WinZo Bot/AI आधारित तंत्रों का उपयोग कर ग्राहकों को वास्तविक मनुष्यों के खिलाफ खेल खेलने के बजाय ऑटोमेटेड प्रोफाइल के सामने खेलने को मजबूर करता रहा था, जिससे कथित ₹177 करोड़ से अधिक लाभ अर्जित हुआ।
विश्लेषकों का कहना है कि कोर्ट का यह कदम, ZO के खाते को डी-फ्रीज़ करने के पक्ष में राहत देने की दिशा में पहला औपचारिक कदम है, क्योंकि कंपनी ने ‘बोर्ड रेज़ोल्यूशन’ के माध्यम से यह तर्क रखा था कि WinZo के खाते पर ED द्वारा रोक लगा देने से उसकी संचालन क्षमता प्रभावित हुई है और वेतन सम्बन्धी जवाबदेही को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। ZO के वरिष्ठ वकील का कहना है कि ZO वास्तव में WinZo के कर्मचारियों के लिए जिम्मेदार है, जिनके वेतन भुगतान की मांग कंपनी के कानूनी और वित्तीय दायित्वों में पूर्व से शामिल हैं।
वहीं दूसरी ओर ED ने अदालत में यह भी कहा कि ZO के ₹11.5 करोड़ मासिक वेतन दावे और उसके वित्तीय विवरणों के बीच असंगति है। ED का दावा है कि May 2023 में स्थापित इस सहायक कंपनी के खातों में केवल सीमित आय और खर्च रिकॉर्ड हैं, जिससे इतना बड़ा वेतन खर्च उचित रूप से समर्थित नहीं लगता। ED ने यह भी विरोध जताया कि ZO का वेतन दावा WinZo द्वारा पहले भी स्थानीय PMLA अदालत में किया जा चुका है, और इस तरह के दावों को अलग-अलग न्यायिक मंचों पर स्वीकार किए जाने से duplicate claims यानी दोहरे दावों का जोखिम होता है।
यह सुनवाई PMLA (Prevention of Money Laundering Act, 2002) के तहत ED द्वारा से किए गए धनशोधन जांच के एक बड़े हिस्से का हिस्सा है जिसमें WinZo, उसके प्रमोटर, निदेशक और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। ED का आरोप है कि WinZo के खेल प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ताओं से राशि एकत्रित की गई और उसके ‘real money games’ में वह आरोप लगाया गया कि कंपनी ने उपयोगकर्ताओं को यह जानकारी दिए बिना ऑटोमेटेड प्रणाली के खिलाफ खेल खेलने को कहा गया, जिसने कथित रूप से बाधित प्रतियोगिता और धोखाधड़ी के माध्यम से लाभ अर्जित किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल प्रोविजनल दिशा निर्देश हैं और कंपनी के खातों को डी-फ्रीज़ करने या पूर्ण रूप से मुक्त करने का निर्णय आगे की सुनवाई में लिया जाएगा। कोर्ट यह भी पूछ रही है कि क्या ED खातों को डी-फ्रीज़ करने के बदले में बैंक गारंटी स्वीकार कर सकता है, जैसा कि पहले मामलों में भी विचार किया जा चुका है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी धन अवैध मार्ग से बाहर न निकले या आरोपियों द्वारा संपत्ति को छिपाने के प्रयास न किए जाएँ।
यह मामला सिर्फ WinZo और ZO तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में वित्तीय पारदर्शिता, जिम्मेदारी और नियामक जांचों के अधिकार के बीच संतुलन की चुनौती भी पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत द्वारा जारी यह निर्देश ZO के कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ ED की जांच प्रक्रिया की गंभीरता और कानूनी औचित्य को भी परकशित करता है।
अब आने वाली सुनवाई में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत क्या सीमित रूप से ZO खातों से कर्मचारियों के वेतन भुगतान को अनुमति देती है, या ED के तर्कों को अधिक मजबूती प्रदान करते हुए आगे की रोकथाम और विस्तृत वित्तीय डेटा की मांग करती है। अदालत का यह मामला डिजिटल अर्थव्यवस्था, नियामक अधिकार और कर्मचारियों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उभर सकता है।








