इंग्लैंड और भारत के बीच एजबैस्टन में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन वह दृश्य देखने को मिला, जो टेस्ट क्रिकेट के रोमांच को हमेशा के लिए यादगार बना देता है। भारतीय पहली पारी के 587 रनों के पहाड़ के जवाब में इंग्लैंड ने शनिवार सुबह 84/5 पर पस्त होते‑होते दम तोड़ा था। स्टेडियम में बैठे स्थानीय दर्शकों को लगने लगा था कि मैच का निर्णायक क्षण शायद जल्द ही उनके सामने होगा, परंतु ठीक उसी समय क्रीज पर उतरे दो युवा बल्लेबाज़—जैमी स्मिथ और हैरी ब्रुक—ने ऐसा प्रतिरोध किया कि बैलेन्स पूरी तरह बदल गया।
जैमी स्मिथ, जिन्हें अभी कुछ ही टेस्ट खेले हैं, ने शुरुआत में बल्लेबाज़ी को स्थिर किया। उन्होंने पहले घंटे में लगभग हर गेंद खेली, जाँच‑पड़ताल की, गेंद की सीम मूवमेंट को समझा और फिर धीरे‑धीरे आक्रामकता की लय पकड़ ली। दूसरी ओर हैरी ब्रुक ने वह तेज़ी दिखाई जिसके लिए ‘बाज़बॉल’ रणनीति मशहूर हो चुकी है—कवर ड्राइव, पुल शॉट और आक्रामक कट्स से उन्होंने भारतीय हमले की धार कुंद कर दी। दोनों ने मिलकर छठे विकेट के लिए 303 रनों की साझेदारी रची, जो किसी भी टीम के लिए 100 रन से कम पर पांच विकेट गिर जाने के बाद की सबसे बड़ी इंग्लिश पार्टनरशिप में शामिल हो गई।
स्मिथ ने सिर्फ 80 गेंदों में शतक जड़ते हुए इंग्लैंड के लिए भारत के विरुद्ध किसी विकेटकीपर द्वारा सबसे तेज़ टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड बनाया। उनकी पारी की खासियत थी तकनीकी निश्चिंतता—फुटवर्क छोटा, हेड पोज़िशन स्थिर और गेंद की लाइन को आख़िरी पल तक पढ़ने की जिद। उन्होंने पिच के दोनों छोर का समान उपयोग किया और बाउंस का फायदा उठाते हुए ऑफ‑साइड में ज़ोरदार कट्स निकाले। जैसे‑जैसे उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया, उन्होंने रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल को क्रीज पर उतर कर लॉन्ग‑ऑन के ऊपर से छक्के भी लगाए।
ब्रुक की बल्लेबाज़ी पूरी तरह विपरीत स्वभाव की रही—पहले से ही आक्रमण के मूड में, उन्होंने बुमराह के स्पैल की पहली ही ओवर में स्क्वायर कट से बाउंड्री निकालकर संकेत दिया कि वे बैकफुट पर जाने वाले नहीं हैं। ब्रुक का फुटवर्क भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों को शॉर्ट‑पिच रणनीति से दूर रखता रहा। उनकी स्ट्राइक रोटेशन की क्षमता ने स्मिथ को सांस लेने का मौका दिया और साझेदारी को ठोस आधार मिला। 158 रनों की ब्रुक की पारी में 21 चौके और तीन छक्के शामिल थे, पर सबसे अहम रहा उनका मैदान पर लगाया गया ‘ब्लाइंडर’—मोहम्मद सिराज की गुडलेंथ गेंद को फ्लिक करते हुए स्क्वायर‑लेग बाउंड्री के पार भेजना, जिसने भारतीय कप्तान को फील्ड बदलनी पड़ी।
भारतीय गेंदबाज़ों की बात करें तो पहले सत्र में सिराज ने एक शानदार छह विकेट झटके थे, लेकिन दूसरा सत्र पूरी तरह इंग्लैंड के नाम रहा। गेंद थोड़ी नरम होते ही पैटर्न बदल गया। सिराज और आकाशदीप दोनों को नई‑नई लाइनें ट्राई करनी पड़ीं, फिर भी दोनों युवा बल्लेबाज़ आसानी से ड्राइव, फ्लिक और कट लगाते रहे। आफ़ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को तेजी से लुढ़कते रनरेट को रोकने के लिए बीच‑बीच में लाया गया, पर वे भी दोनों छोर से छूटी लेंथ और बेबस वेरिएशन के कारण दबाव नहीं बना पाए। जडेजा का राउंड‑आर्म लगातार मिडल और ऑफ पर रहा, फिर भी स्मिथ को स्वीप की छूट देने से रन रुक नहीं पाए।
दोनों की साझेदारी का असर यह हुआ कि चाय तक इंग्लैंड 350 रन के पार पहुंच चुका था और फॉलो‑ऑन की तलवार सिर से हट गई थी। अंतिम सत्र में आख़िरकार ब्रुक को सिराज की एक एंगल होती इन‑स्विंगर ने पगबाधा कर दिया, लेकिन तब तक इंग्लैंड का स्कोर 387/6 हो चुका था। इसके बाद स्मिथ ने टेलेंडर्स के साथ संयम दिखाया, वुड और एंडरसन से सिर्फ स्ट्राइक रोेट करने को कहा, जिससे इंग्लैंड 407 रन तक पहुँचा और पारी घोषित नहीं, पूरी समाप्त हुई। वह 184 रन पर नाबाद लौटे—अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर, विकेटकीपर‑बल्लेबाज़ के रूप में एजबैस्टन की सबसे बड़ी पारी और घर के मैदान पर पहली मेमोराबिल शतक।
407 के जवाब में भारत को 180 रन की पतली‑सी बढ़त मिली। शाम के आख़िरी आधे घंटे में इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों ने नई गेंद के साथ नयी ऊर्जा दिखाई। जेम्स एंडरसन ने चोट से वापसी के बाद पहली ही ओवर में रोहित शर्मा को आउट‑स्विंग से चिढ़ाया, पर रोहित ने संयम दिखाते हुए डिफेंस किया। दिन की आख़िरी गेंद पर वुड ने शुभमन गिल को तेज़ बाउंसर से चौंकाया, गेंद हेलमेट ग्रिल से टकराते‑टकराते बची, और उछाल को देखकर यह साफ था कि चौथे दिन इंग्लिश गेंदबाज़ और ज्यादा धार से उतरेंगे।
स्मिथ और ब्रुक की इस जुड़ाव ने सिर्फ स्कोरबोर्ड पर फर्क नहीं डाला, बल्कि ड्रेसिंग रूम के मनोबल में जान फूंकी। कप्तान बेन स्टोक्स, जो पहले सत्र में निराश दिख रहे थे, साझेदारी के दौरान मैदान के बाहर उत्साह से साथी गेंदबाज़ों को योजनाएँ समझाते दिखे। कोच ब्रेंडन मैकुलम के हाव‑भाव से भी लगा कि उनकी ‘बाज़बॉल’ फिलोसॉफी ने फिर खुद को सही साबित कर दिया—स्थिति कितनी भी कठिन हो, आक्रमण ही सर्वोत्तम बचाव है।
इस मैराथन साझेदारी ने टेस्ट क्रिकेट की अनिश्चितता की खूबसूरती को एक बार फिर उजागर किया है। तीन सत्र पहले तक मैच एकतरफा दिख रहा था; एक सत्र में सब बदल गया। चौथा दिन अब निर्णायक होगा—भारत यदि सुबह जल्दी विकेट खोता है तो इंग्लैंड को चौथी पारी में लक्ष्य कम मिल सकता है, और अगर भारत 300 से ऊपर लीड खड़ा कर देता है तो इंग्लैंड को फिर से बल्ले से अजमाना होगा।
भले ही मैच का परिणाम अभी अनिश्चित हो, लेकिन तीसरे दिन की यह अविस्मरणीय साझेदारी इंग्लैंड और विश्व क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। स्मिथ और ब्रुक ने साबित कर दिया कि हालात कैसे भी हों, साहस, तकनीक और सकारात्मक सोच से किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है। अगले दो दिन रोमांच तय है, पर इतिहास पहले ही लिख दिया गया—एजबैस्टन ने एक और क्लासिक पलटवार देख लिया, और कई सालों तक इस साझेदारी का जिक्र क्रिकेट प्रेमियों की बातचीत का हिस्सा रहेगा।








