भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग को नया प्रोत्साहन देने के लिए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल फरवरी 2026 में ओटावा, कनाडा का официальный दौरा करेंगे, यह जानकारी आज पुष्टि की गई है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सुरक्षा संवाद और उच्च-स्तरीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब कनाडा की नई सरकार ने भारत-कनाडा संबंधों को दोनों तरफ़ के नुकसान-देह गतिरोध से बाहर निकालकर मजबूत साझेदारी की दिशा में ले जाने का इरादा जाहिर किया है। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा सहयोग में कई वार्ताएँ हुई हैं, जिनमें विशेष रूप से आतंकवाद, संगठित अपराध और खुफिया साझेदारी पर चर्चा हुई है। सितंबर 2025 में ही भारतीय NSA डोभाल ने अपनी कनाडाई समकक्ष नथाली ड्रोइन के साथ नई दिल्ली में विस्तृत सुरक्षा वार्ता की थी, जिसमें दोनों पक्षों ने विश्वास बहाल करने और सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
डोभाल की यह यात्रा सिक्योरिटी एंड लॉ एन्फोर्समेंट डायलॉग के अंतर्गत आ रही है और यह संकेत देती है कि दोनों देशों का ध्यान सिर्फ विवादों को सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की साझेदारी को मज़बूत करने की दिशा में काम करना है। यह यात्रा कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के भारत की ओर होने वाले दौरे से भी लगभग एक माह पहले की है, जो मार्च 2026 की शुरुआत में होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस प्रकार दोनों पक्ष क्रमिक भेंटवार्ताओं के ज़रिये द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सकारात्मक दिशा देने की कोशिश में हैं।
कनाडा-भारत संबंध पिछले कुछ वर्षों में खालिस्तान आंदोलन और कूटनीतिक विवादों के कारण तनाव में रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर गिरा था। इस तनाव की शुरुआत 2023 में हुई जब खालिस्तान समर्थकों के गतिविधियों को लेकर कनाडा और भारत के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ, और डिप्लोमैटिक स्टाफ निकाले जाने जैसे कदम भी उठाए गए। उस समय से दोनों पक्षों ने आपसी संपर्क को बनाए रखने और विवादों को प्रतीकात्मक रूप से कम करने के प्रयास किए हैं।
अब NSA डोभाल की यात्रा, जिसे जानकार रणनीतिक सहयोग के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है, समाधान-मुखी बातचीत को विस्तारित करेगी। इसमें सुरक्षा, खुफिया साझेदारी, सीमा पार संगठित अपराध पर संयुक्त कार्रवाई और डाटा तथा साइबर सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे सहयोग से न केवल दोनों देशों के सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि आपसी विश्वास और कूटनीतिक रिश्ते भी ज्यादा स्थिर होंगे।
कनाडा की नई सरकार ने भी व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा और तकनीकी निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहकार्य को बढ़ाने पर जोर दिया है। फरवरी महीने में भारत में 21 प्रतिष्ठित कनाडाई विश्वविद्यालयों की एक उच्च-स्तरीय डेलिगेशन के दौरे का कार्यक्रम पहले से तय है, जो शिक्षा, अनुसंधान और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा। यह कदम दोनों देशों के बीच लोग-से-लोग संपर्क और सांस्कृतिक समझ को भी सुदृढ़ कर सकता है।
इस दौरे की रणनीतिक पृष्ठभूमि में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और आर्थिक बदलाव भी एक बड़ा कारक है। भारत और कनाडा दोनों ही विकसित लोकतांत्रिक देश हैं जो अपनी रणनीतिक व आर्थिक प्राथमिकताओं को वैश्विक स्तर पर पुनः परिभाषित कर रहे हैं। दोनों पक्ष चीन-प्रभाव, तकनीकी विकास, ऊर्जा सुरक्षा और बहुपक्षीय व्यापार ढांचे जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श कर रहे हैं, ताकि सामूहिक रूप से स्थिरता और विकास ला सकें।
विशेष रूप से कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि डोभाल की यात्रा कनाडा-भारत रिश्तों में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में समझी जानी चाहिए — जहाँ पहले विवादों का पलड़ा भारी था, वहीं अब बातचीत, सहयोग और साझा हितों पर केंद्रित वार्ता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह कदम न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मज़बूत करेगा बल्कि वैश्विक स्थिरता को भी सकारात्मक दिशा देगा।
अगले कुछ सप्ताह में डोभाल की यात्रा और उसके परिणामों पर दोनों देशों की विदेश मंत्रालयों से दी जाने वाली आधिकारिक घोषणाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। यह दौरा भारत-कनाडा की राजनयिक रणनीति में एक नया अध्याय लिख सकता है, जो भविष्य के सहयोग के स्तर और दिशा दोनों के लिए निर्णायक साबित होगा।
मुख्य बिंदु:
भारत और कनाडा दोनों रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा संवाद को बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं, और NSA अजीत डोभाल के फरवरी दौरे को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। यह कदम दोनों देशों को पुराने विवादों से आगे बढ़कर स्थिर, व्यापक और सकारात्मक सहयोग की ओर ले जाने में मदद करेगा।





