भारत के सह-अध्यक्ष कोच गौतम गंभीर का सोशल मीडिया पर एक संदेश चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने “कोच के पास कोई Unlimited Authority (असीमित अधिकार) नहीं है” जैसा संकेत दिया था। यह बयान उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा उनके काम की तारीफ़ के जवाब में दिया, जिसमें थरूर ने कहा कि भारतीय टीम के कोच का काम “प्रधानमंत्री के बाद सबसे कठिन” है। गंभीर ने अपने संदेश में यह भी कहा कि टीम के भीतर रिश्तों के बारे में चल रही अटकलें उन्हें “हैरान” नहीं करतीं।
सोशल मीडिया पर इस तरह के बयान ने तेजी से प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर दीं और आलोचना-समर्थन दोनों ही रूपों में लोगों ने अपनी राय रखी। ऐसे में सीनियर टीम सदस्य अजिंक्य रहाणे ने गंभीर को सलाह दी है कि वे इस तरह की ऑनलाइन चर्चाओं को टालें। रहाणे का मानना है कि एक राष्ट्रीय टीम का कोच होना बहुत जिम्मेदारी वाला काम है और वक्त की सीमा में, विशेषकर ICC Men’s T20 World Cup 2026 की तैयारियों के बीच, उन्हें ऑनलाइन बहसों में उलझने के बजाय टीम और उसके प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।
रहाणे ने कहा कि गंभीर को सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति कम करनी चाहिए ताकि वे आलोचनाओं और प्रतिक्रियाओं पर अधिक ध्यान न दें। इस सलाह का उद्देश्य स्पष्ट है—आने वाले विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट की तैयारियों से कोच का ध्यान भटकना नहीं चाहिए। रहाणे ने यह भी सुझाव दिया कि यह सलाह टेस्ट, ODI और T20I जैसे सभी प्रारूपों में टीम की कार्यशैली पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि कोच का मन वास्तविक क्रिकेट-रणनीति में ही लगा रहेगा।
यह सलाह विशेष रूप से ऐसे समय में आई है जब भारत के प्रदर्शन पर भी ताज़ा बहस चल रही है। टीम ने हाल के न्यूज़ीलैंड दौरे में टी20 श्रृंखला में कुछ मैचों में शानदार जीत दर्ज की है, लेकिन टेस्ट और ODI जैसे प्रारूपों में कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। ऐसे में कोच की शब्दावली और ऑनलाइन प्रतिक्रियाएँ भी अतिरिक्त ध्यान आकर्षित कर रही हैं। रहाणे यह मानते हैं कि सोशल मीडिया विवादों से विचलित होने से टी20 विश्व कप 2026 की तैयारी प्रभावित हो सकती है और इसलिए यह सलाह दी गई है कि गंभीर अगले मुख्य टूर्नामेंट तक सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि सोशल मीडिया पर कोच की टिप्पणियों ने प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच बड़े-छोटे बहसों को जन्म दिया है जिनमें टीम के भीतर रणनीति, चयन निर्णय और वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ तालमेल जैसे मुद्दों पर प्रश्न उठ रहे हैं। रहाणे का संदेश यह सुझाव देता है कि इन बाहरी आवाज़ों पर ध्यान देना तात्कालिक रणनीति और विश्व कप लक्ष्य की दिशा में बाधा बन सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का बड़ा सबक यह है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता सिर्फ तकनीकी कौशल और रणनीति से नहीं मापी जाती, बल्कि मानसिक एकाग्रता, टीम-फोकस और परिस्थिति-अनुकूलता से भी होती है। जब कोच किसी बड़े टूर्नामेंट के करीब होते हैं, तो टीम के प्रदर्शन के अलावा उनके निर्णय, बयान और व्यवहार भी आलोचनाओं के दायरे में आते हैं। इसलिए ऐसी सलाह यह दर्शाती है कि टीम की एकता और सफलता को प्राथमिकता देना ही टीम इंडिया की संभावित उपलब्धियों को सुनिश्चित कर सकता है।
निष्कर्ष:
गंभीर को दी गई यह सलाह केवल एक व्यक्तिगत सुझाव नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है कि जब टीम विश्व-स्तरीय टूर्नामेंट की तैयारी कर रही हो, तो बाहरी शोर-शराबे से दूर रहकर मुख्य लक्ष्य—टी20 वर्ल्ड कप पर ध्यान केंद्रित करना ही सबसे लाभदायक साबित होगा। यह सलाह उन्हें ऑनलाइन बहसों और आलोचना से बचने के साथ-साथ टीम के लिए अपनी भूमिका पर भरपूर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।








