बजट 2026 में महिला सशक्तिकरण को सरकार ने केवल सामाजिक पहल के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की अनिवार्य शर्त के रूप में प्रस्तुत किया है। यह बजट इस सोच को मजबूत करता है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तभी देश की प्रगति टिकाऊ और समावेशी होगी।
सरकार ने बजट 2026 में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, रोजगार, उद्यमिता, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को एक साथ संबोधित करने की कोशिश की है। इसका उद्देश्य महिलाओं को योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की भागीदार बनाना है।
बजट में महिला उद्यमिता को खास प्राथमिकता दी गई है। स्वयं सहायता समूहों, महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों के लिए आसान ऋण, कम ब्याज दर और क्रेडिट गारंटी जैसी सुविधाओं को मजबूत किया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं स्वरोज़गार की ओर आगे बढ़ सकेंगी।
स्वयं सहायता समूहों के लिए बजट 2026 को एक मजबूत समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने इन समूहों को वित्तीय सहायता, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने और बाजार तक सीधी पहुंच देने पर जोर दिया है। इससे लाखों महिलाएं स्थानीय स्तर पर आय अर्जित कर सकेंगी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
रोजगार के क्षेत्र में बजट 2026 ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई अप्रत्यक्ष लेकिन प्रभावी कदम उठाए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निवेश महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्थिर रोजगार अवसर पैदा करेगा।
कौशल विकास योजनाओं में भी महिलाओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है। तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल स्किल्स, फाइनेंशियल लिटरेसी और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे महिलाएं भविष्य की नौकरियों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगी।
बजट 2026 में कामकाजी महिलाओं की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है। कार्यस्थल पर सुरक्षा, बाल देखभाल सुविधाएं और लचीले कार्य अवसर जैसे मुद्दों को नीति स्तर पर समर्थन मिलने से महिलाओं के लिए नौकरी और परिवार के बीच संतुलन आसान हो सकता है।
महिलाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश को भी महिला सशक्तिकरण की बुनियाद माना गया है। बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से महिलाओं की दीर्घकालिक क्षमता बढ़ेगी, जिसका असर सीधे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर पड़ेगा।
डिजिटल समावेशन बजट 2026 का एक और अहम पहलू है। महिलाओं को डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और ई-कॉमर्स से जोड़ने के प्रयासों से वे बाजार और वित्तीय प्रणाली का सक्रिय हिस्सा बन सकेंगी। इससे खासकर ग्रामीण महिलाओं को नई पहचान और अवसर मिलेंगे।
बजट में महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूती दी गई है। बीमा, पेंशन और सहायता योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से महिलाओं को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का भरोसा मिलेगा।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में महिला सशक्तिकरण को केवल वादों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि रोजगार, उद्यमिता, कौशल और सुरक्षा के माध्यम से इसे जमीन से जोड़ने की कोशिश की गई है। यह बजट यह संकेत देता है कि महिलाओं की प्रगति को देश की प्रगति से अलग नहीं देखा जा सकता।
अगर इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता में स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। बजट 2026 इस दिशा में एक मजबूत और भरोसेमंद कदम के रूप में सामने आता है।














