देश की बड़ी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों में शुमार HDB फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने IPO के ज़रिए निवेशकों का जबरदस्त ध्यान खींचा है। यह पब्लिक ऑफर इस वर्ष की सबसे बड़ी पेशकशों में शामिल है, और इसकी सफलता को लेकर शेयर बाजार में बड़ी उत्सुकता देखी जा रही है। IPO के बंद होने के साथ ही अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह स्टॉक प्रीमियम पर लिस्ट होगा, और लिस्टिंग के दिन निवेशकों को कितना लाभ हो सकता है?
HDB फाइनेंशियल सर्विसेज, HDFC बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और यह देशभर में कंज्यूमर लेंडिंग, गोल्ड लोन, बिजनेस लोन, कंज्यूमर ड्युरेबल फाइनेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। कंपनी का नेटवर्क देश के कई छोटे-बड़े शहरों में फैला है और इसका फोकस खासतौर पर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लोन पहुंचाने पर है। इसके पास मजबूत ग्राहक आधार, अच्छी एसेट क्वालिटी और डिजिटल लेंडिंग में उल्लेखनीय पकड़ है।
कंपनी ने इस IPO के ज़रिए लगभग ₹12,500 करोड़ की राशि जुटाने की योजना बनाई है। बाजार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह पब्लिक ऑफर पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसमें मौजूदा शेयरधारकों द्वारा हिस्सेदारी घटाई जा रही है। इसका मतलब है कि कंपनी को सीधे तौर पर इस ऑफर से कोई पूंजी नहीं मिलेगी, लेकिन लिस्टिंग के बाद बाजार में उसकी साख और पारदर्शिता को एक नई मजबूती जरूर मिलेगी।
IPO को निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। खासकर क्यूआईबी यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स और एनआईआई यानी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की ओर से भारी बिड्स देखने को मिलीं। यह दर्शाता है कि बड़े निवेशकों को इस कंपनी में लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावनाएं नजर आ रही हैं। हालांकि, रिटेल निवेशकों की ओर से थोड़ी सीमित प्रतिक्रिया मिली, जिससे यह स्पष्ट होता है कि छोटे निवेशक अब भी मूल्यांकन को लेकर कुछ हिचकिचा रहे हैं।
लिस्टिंग को लेकर बाजार में चर्चाएं जोरों पर हैं। ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर का प्रीमियम ₹70 से ₹80 के बीच देखा जा रहा है, जो इश्यू प्राइस से लगभग 8 से 10 प्रतिशत ऊपर है। इससे यह उम्मीद की जा रही है कि लिस्टिंग के पहले ही दिन HDB फाइनेंशियल का स्टॉक अच्छा प्रदर्शन कर सकता है। हालांकि, यह भी देखा गया है कि कई बड़े IPO प्रारंभिक जोश के बावजूद कुछ ही हफ्तों में दबाव में आ जाते हैं, इसलिए लॉन्ग टर्म नजरिए से ही निवेश को तवज्जो देना चाहिए।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों की बात करें तो कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) एक लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है। साथ ही इसका नेट प्रॉफिट ₹2,100 करोड़ के आसपास रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है और उसे मुनाफा कमाने में भी अच्छी सफलता मिली है। इसके अलावा, कंपनी की एसेट क्वालिटी भी स्थिर रही है, जो मौजूदा एनबीएफसी संकट के दौर में एक सकारात्मक संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि HDB फाइनेंशियल का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत है। यह HDFC बैंक के ब्रांड और वितरण नेटवर्क से भी लाभ उठाता है। साथ ही, इसका कलेक्शन मॉडल और जोखिम प्रबंधन प्रणाली काफी विकसित और टिकाऊ मानी जाती है। यही वजह है कि निवेश सलाहकार इस इश्यू को लॉन्ग टर्म के लिए उपयुक्त मानते हैं।
हालांकि, इस IPO के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। सबसे पहले तो यह एक ऑफर फॉर सेल है, जिससे कंपनी के विस्तार के लिए सीधे कोई पूंजी नहीं आएगी। इसके अलावा, NBFC सेक्टर वर्तमान में कई नियामकीय और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है — जैसे कि ब्याज दरों में अनिश्चितता, RBI की सख्ती, और लोन रिकवरी की बढ़ती लागत। अगर आर्थिक स्थितियां और खराब होती हैं तो कंपनी की कलेक्शन एफिशिएंसी और प्रोफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
इसके साथ ही, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी एक चुनौती है। कई स्टार्टअप्स और फिनटेक कंपनियां बेहद आक्रामक तरीके से कंज्यूमर और पर्सनल लोन के मार्केट में उतर रही हैं। ऐसे में HDB को अपने पारंपरिक मॉडल के साथ-साथ डिजिटल क्षमता भी तेजी से विकसित करनी होगी ताकि वह बाजार में अपनी स्थिति बनाए रख सके।
रही बात लिस्टिंग की, तो कंपनी के शेयर 2 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होंगे। उम्मीद की जा रही है कि अगर बाजार का सेंटीमेंट सकारात्मक बना रहा तो यह स्टॉक प्रीमियम के साथ खुलेगा। लेकिन इसके बाद इसके प्रदर्शन पर कंपनी के फंडामेंटल, सेक्टर ट्रेंड्स और मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स का असर देखने को मिलेगा।
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि IPO में भाग लेना एक शुरुआती मौका होता है, लेकिन उसके बाद असली कहानी तब शुरू होती है जब कंपनी शेयर बाजार की लिस्टिंग के बाद खुद को हर तिमाही में साबित करती है। इसलिए सिर्फ ग्रे मार्केट प्रीमियम देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। बेहतर यही होगा कि निवेशक अपनी जोखिम क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और कंपनी के दीर्घकालिक विज़न को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लें।
HDB फाइनेंशियल के इस IPO ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि किसी कंपनी का आधार मजबूत हो, ब्रांड पहचान प्रबल हो और ग्रोथ की स्पष्ट दिशा हो, तो बाजार उसे जरूर सराहता है। अब सभी की निगाहें 2 जुलाई की सुबह की ओर हैं, जब यह तय होगा कि निवेशकों की उम्मीदें रंग लाती हैं या नहीं। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह IPO आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में एक हो सकता है।








