बजट 2026 में ग्रीन एनर्जी और जलवायु परिवर्तन को सरकार ने भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम आधार माना है। यह बजट इस स्पष्ट सोच को दर्शाता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण अब एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु कार्रवाई पर विशेष जोर दिया है।
ग्रीन एनर्जी को बजट 2026 में केवल ऊर्जा विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार के बड़े स्रोत के रूप में देखा गया है। सरकार का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा में निवेश से न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
सौर ऊर्जा बजट 2026 की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रही है। बड़े सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर योजनाएं और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित किए गए हैं। इससे बिजली उत्पादन बढ़ेगा और किसानों व छोटे उपभोक्ताओं को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।
पवन ऊर्जा को भी बजट 2026 में नया प्रोत्साहन मिला है। तटीय और पवन-संपन्न क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को समर्थन देने से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में विविधता आएगी। इससे देश की कुल ऊर्जा क्षमता अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी।
ग्रीन हाइड्रोजन को बजट 2026 में भविष्य की ऊर्जा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सरकार ने इस क्षेत्र में अनुसंधान, उत्पादन और बुनियादी ढांचे के विकास पर निवेश बढ़ाने की बात कही है। इससे भारी उद्योग, परिवहन और निर्यात क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना भी बजट 2026 का अहम हिस्सा है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और स्वच्छ परिवहन को समर्थन देने से पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटेगी। इससे शहरी प्रदूषण कम होने और ईंधन आयात पर दबाव घटने की उम्मीद है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बजट 2026 में अनुकूलन और रोकथाम दोनों पर ध्यान दिया गया है। बाढ़, सूखा और चरम मौसम से प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाओं का समर्थन किया गया है, ताकि कृषि और आजीविका पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।
ऊर्जा दक्षता को भी बजट 2026 में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उद्योगों, भवनों और उपकरणों में ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिए गए हैं। इससे कम ऊर्जा में अधिक उत्पादन संभव होगा और कार्बन फुटप्रिंट घटेगा।
बजट 2026 में ग्रीन फाइनेंस और हरित निवेश को बढ़ावा देने के संकेत भी मिले हैं। सरकार चाहती है कि निजी और विदेशी निवेशक स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं में अधिक भागीदारी करें। इससे ग्रीन सेक्टर में पूंजी प्रवाह तेज होगा।
ग्रीन एनर्जी से जुड़े रोजगार भी इस बजट का अहम पहलू हैं। सौर, पवन, ईवी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से लाखों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। ये रोजगार न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे, बल्कि तकनीकी कौशल आधारित भी होंगे।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में ग्रीन एनर्जी और जलवायु परिवर्तन पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि भारत विकास की राह पर चलते हुए पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। यह बजट केवल आज की जरूरतों का समाधान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य की नींव रखने का प्रयास है।
यदि ये नीतियां जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी और जलवायु कार्रवाई में एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है।














