बजट 2026 को अगर किसी एक वर्ग के नजरिए से सबसे ज्यादा चर्चा में देखा जा रहा है, तो वह है मध्यम वर्ग। नौकरीपेशा लोग, छोटे कारोबारी, स्वरोज़गार करने वाले और शहरी-ग्रामीण मध्य आय वर्ग लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहे थे। बजट 2026 में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि मध्यम वर्ग को केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ माना जा रहा है।
इस बजट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सरकार मध्यम वर्ग की आय, बचत और जीवन-स्तर को संतुलित रूप से बेहतर बनाना चाहती है। टैक्स से लेकर रोजगार, महंगाई नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं तक कई मोर्चों पर मध्यम वर्ग को केंद्र में रखा गया है।
आयकर के मोर्चे पर बजट 2026 को मध्यम वर्ग के लिए सबसे राहत भरा माना जा रहा है। नई आयकर स्लैब के तहत ₹7 लाख तक की सालाना आय को पूरी तरह टैक्स-फ्री रखा गया है। इससे करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और उनकी नेट सैलरी में बढ़ोतरी होगी।
इसके साथ ही टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया है, ताकि आम करदाता को जटिल गणनाओं और नियमों में न उलझना पड़े। सरकार का उद्देश्य है कि टैक्स फाइल करना एक बोझ नहीं, बल्कि एक आसान प्रक्रिया बने। इससे मध्यम वर्ग में टैक्स अनुपालन का भरोसा भी बढ़ेगा।
नई टैक्स व्यवस्था में कटौतियों को सीमित जरूर किया गया है, लेकिन कम टैक्स दरों से उसकी भरपाई होती दिख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार मध्यम वर्ग के लिए अब टैक्स प्लानिंग कम और सीधी बचत ज्यादा असरदार होगी।
बजट 2026 में महंगाई को लेकर भी मध्यम वर्ग की चिंता को ध्यान में रखा गया है। सरकार ने आपूर्ति सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर जोर दिया है। इसका असर आने वाले समय में रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों पर पड़ने की उम्मीद है।
घर खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लिए भी बजट में सकारात्मक संकेत हैं। शहरी आवास, अफोर्डेबल हाउसिंग और बुनियादी ढांचे पर बढ़े खर्च से रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूती मिलेगी। इससे घरों की उपलब्धता बढ़ेगी और लंबे समय में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
रोजगार के मोर्चे पर बजट 2026 ने इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर देकर अप्रत्यक्ष रूप से मध्यम वर्ग को मजबूत करने की कोशिश की है। जब सड़कें, रेलवे, ऊर्जा और डिजिटल परियोजनाएं बढ़ती हैं, तो सबसे ज्यादा रोजगार मध्य आय वर्ग के लिए ही पैदा होते हैं।
सरकार ने स्किल डेवलपमेंट और नई तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाने की बात कही है। इससे मध्यम वर्ग के युवा बेहतर नौकरी और वेतन के अवसर हासिल कर सकेंगे। यह बजट केवल आज की राहत नहीं, बल्कि भविष्य की आय बढ़ाने की रणनीति भी दिखाता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे खर्च मध्यम वर्ग की जेब पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। बजट 2026 में इन दोनों क्षेत्रों में सरकारी निवेश बढ़ाने से निजी खर्च का बोझ धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेहतर सरकारी स्कूल, कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधाएं मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत बन सकती हैं।
डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर सरकार ने मध्यम वर्ग का समय और पैसा दोनों बचाने की दिशा में कदम उठाया है। टैक्स फाइलिंग, सरकारी सेवाएं और भुगतान प्रणाली के डिजिटल होने से रोजमर्रा की परेशानियां कम होंगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 को मध्यम वर्ग के लिए भरोसे और संतुलन का बजट कहा जा सकता है। इसमें न तो बहुत बड़े लोकलुभावन वादे हैं और न ही सख्त फैसलों का दबाव। इसके बजाय सरकार ने आय, कर, रोजगार और जीवन-स्तर को धीरे-धीरे मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
यह बजट यह संकेत देता है कि मध्यम वर्ग को केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ के रूप में देखा जा रहा है। अगर घोषित नीतियां जमीन पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति और आत्मविश्वास दोनों मजबूत हो सकते हैं।














