बजट 2026 में केंद्र सरकार ने पूंजीगत व्यय यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर को एक बार फिर अपनी आर्थिक रणनीति का केंद्र बनाया है। यह साफ संकेत है कि सरकार अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखना चाहती है। पूंजीगत व्यय वह खर्च होता है जो देश की उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और आर्थिक ताकत को भविष्य के लिए तैयार करता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास मॉडल को अपनाया है और बजट 2026 उसी सोच को आगे बढ़ाता है। सरकार का मानना है कि जब सड़कें, रेलवे, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल ढांचा मजबूत होता है, तब निजी निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां अपने आप गति पकड़ती हैं।
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय को केवल खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखा गया है। इसका उद्देश्य यह है कि आज किया गया हर बड़ा निवेश आने वाले वर्षों में देश की आय, रोजगार और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाए। यही वजह है कि सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए भी कैपेक्स पर जोर कम नहीं किया।
सबसे बड़ा फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर पर रखा गया है। सड़क और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया गया है। बेहतर सड़क नेटवर्क से माल ढुलाई सस्ती होती है, किसानों को बाजार तक पहुंच आसान होती है और छोटे शहरों व गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं।
रेलवे क्षेत्र भी बजट 2026 के पूंजीगत व्यय का अहम हिस्सा है। नई रेल लाइनों, ट्रैक के दोहरीकरण, आधुनिक स्टेशनों और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। रेलवे में निवेश से न केवल यात्रा सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलेगा।
ऊर्जा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से दिशा दी गई है। बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया गया है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी परियोजनाओं में निवेश से भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
बजट 2026 में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूंजीगत व्यय का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। फाइबर नेटवर्क, 5G कनेक्टिविटी, डिजिटल सरकारी सेवाएं और साइबर सुरक्षा पर खर्च बढ़ाया गया है। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्टार्टअप्स व एमएसएमई को नए अवसर मिलेंगे।
शहरी और ग्रामीण विकास परियोजनाएं भी पूंजीगत व्यय के दायरे में आती हैं। स्मार्ट सिटी मिशन, जल आपूर्ति, सीवरेज सिस्टम और शहरी परिवहन पर निवेश से शहरों की जीवन गुणवत्ता सुधरेगी। वहीं ग्रामीण इलाकों में सड़क, बाजार, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के विकास से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
पूंजीगत व्यय का सबसे बड़ा लाभ रोजगार सृजन के रूप में सामने आता है। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निर्माण, इंजीनियरिंग, ट्रांसपोर्ट और तकनीकी सेवाओं से जुड़े लाखों रोजगार पैदा होते हैं। इससे युवाओं को काम मिलता है और आय में वृद्धि होती है।
निवेश के नजरिए से भी बजट 2026 का कैपेक्स फोकस अहम है। जब सरकार बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश करती है, तो निजी कंपनियों और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। इससे अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह तेज होता है और विकास को गति मिलती है।
पूंजीगत व्यय से देश की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता भी बढ़ती है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्पादन लागत कम होती है, समय की बचत होती है और भारतीय उद्योग वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनते हैं। यह निर्यात बढ़ाने और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों को मजबूत करता है।
बजट 2026 में पूंजीगत व्यय का एक अहम पहलू यह भी है कि इसे संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया गया है। सरकार ने यह संकेत दिया है कि विकास और वित्तीय स्थिरता दोनों को साथ लेकर चला जाएगा। इससे दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026 में पूंजीगत व्यय भारत की विकास रणनीति की रीढ़ के रूप में उभरता है। यह रोजगार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी प्रगति को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। आने वाले वर्षों में इसी पूंजीगत व्यय के आधार पर भारत की आर्थिक मजबूती और वैश्विक भूमिका तय होगी।
यह कहा जा सकता है कि बजट 2026 का कैपेक्स फोकस केवल आज की जरूरतों का जवाब नहीं है, बल्कि आने वाले दशक के लिए भारत को तैयार करने की एक सोच-समझी रणनीति है।














