घंटों एक ही जगह बैठने से आंतों की गति धीमी हो सकती है। कम शारीरिक गतिविधि कब्ज की समस्या को बढ़ाने वाला बड़ा कारक बन सकती है।
डिजिटल काम में व्यस्त लोग अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी से मल कठोर हो जाता है और कब्ज की शिकायत बढ़ती है।
फास्ट फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स की आदत में फाइबर कम होता है। फाइबर की कमी आंतों की सफाई में बाधा बनती है और पाचन धीमा करती है।
लगातार स्क्रीन टाइम और काम का तनाव हार्मोन संतुलन बिगाड़ सकता है। खराब नींद भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 45–60 मिनट में थोड़ी देर टहलें। हल्की एक्सरसाइज आंतों की गतिविधि को बेहतर बनाती है।
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना और नियमित समय पर शौच जाना पाचन को सुधार सकता है। दिनचर्या में नियमितता बहुत जरूरी है।
पवनमुक्तासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कब्ज में राहत देने में सहायक माने जाते हैं।
यदि कब्ज कई दिनों तक बनी रहे, पेट दर्द या खून आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डिजिटल लाइफस्टाइल पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं, लेकिन संतुलित दिनचर्या, सही खानपान और नियमित व्यायाम से कब्ज से बचा जा सकता है।