डिजिटल लाइफस्टाइल का असर

वर्क फ्रॉम होम, लंबे ऑफिस घंटे और बढ़ता स्क्रीन टाइम हमारी दिनचर्या बदल रहे हैं, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र और पेट की सेहत पर पड़ रहा है।

घंटों एक ही जगह बैठने से आंतों की गति धीमी हो सकती है। कम शारीरिक गतिविधि कब्ज की समस्या को बढ़ाने वाला बड़ा कारक बन सकती है।

क्या बैठना ही असली कारण है?

डिजिटल काम में व्यस्त लोग अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी से मल कठोर हो जाता है और कब्ज की शिकायत बढ़ती है।

कम पानी पीना भी वजह

फास्ट फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स की आदत में फाइबर कम होता है। फाइबर की कमी आंतों की सफाई में बाधा बनती है और पाचन धीमा करती है।

फाइबर की कमी

लगातार स्क्रीन टाइम और काम का तनाव हार्मोन संतुलन बिगाड़ सकता है। खराब नींद भी पाचन तंत्र पर नकारात्मक असर डालती है।

तनाव और नींद की कमी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 45–60 मिनट में थोड़ी देर टहलें। हल्की एक्सरसाइज आंतों की गतिविधि को बेहतर बनाती है।

शारीरिक गतिविधि जरूरी

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना और नियमित समय पर शौच जाना पाचन को सुधार सकता है। दिनचर्या में नियमितता बहुत जरूरी है।

सुबह की दिनचर्या सुधारें

पवनमुक्तासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम जैसे योग अभ्यास कब्ज में राहत देने में सहायक माने जाते हैं।

योग और प्राणायाम का लाभ

यदि कब्ज कई दिनों तक बनी रहे, पेट दर्द या खून आने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

डॉक्टर से कब मिलें?

डिजिटल लाइफस्टाइल पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं, लेकिन संतुलित दिनचर्या, सही खानपान और नियमित व्यायाम से कब्ज से बचा जा सकता है।

डिजिटल संतुलन ही समाधान